बिना सोचे- समझे अबॉर्शन पिल्स तो नहीं खाती हैं आप, जाने क्या हो सकते हैं नुकसान?

बिना सोचे- समझे अबॉर्शन पिल्स तो नहीं खाती हैं आप, जाने क्या हो सकते हैं नुकसान?


आजकल कई महिलाएं बिना डॉक्टर की सलाह लिए ही अबॉर्शन पिल्स लेने की सोचती हैं. ये दवाइयां आसानी से ऑनलाइन या मेडिकल स्टोर्स में मिल जाती हैं, लेकिन बिना जानकारी के इनका इस्तेमाल करना खतरनाक हो सकता है. सिर्फ थोड़ी सी गलती आपकी सेहत या भविष्य की प्रेगनेंसी पर असर डाल सकती है. इसलिए यह जरूरी है कि हर महिला इन दवाओं के असर और संभावित जोखिमों का पता हो. तो आइए जानते हैं कि  बिना सोचे- समझे अबॉर्शन पिल्स खाने से क्या नुकसान हो सकते हैं. 

अबॉर्शन पिल्स क्या हैं?

अबॉर्शन पिल्स को मेडिकल भाषा में दवा से गर्भपात कहा जाता है. इसमें मुख्य रूप से दो दवाइयां होती हैं. मिफेप्रिस्टोन (Mifepristone), यह दवा प्रोजेस्टेरोन नामक हार्मोन को ब्लॉक करती है, जो प्रेगनेंसी को बनाए रखने में मदद करता है. मिसोप्रोस्टोल (Misoprostol), यह दवा यूट्रस को सिकुड़ने में मदद करती है और गर्भ के अंदर की सामग्री को बाहर निकाल देती है. इन दवाओं का यूज आमतौर पर प्रेगनेंसी के शुरुआती 10 हफ्तों तक किया जाता है. 

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बिना सोचे- समझे अबॉर्शन पिल्स खाने से क्या नुकसान हो सकते हैं

1. तेज पेट दर्द और ऐंठन यह यूटरस की सामग्री को बाहर निकालने की प्रक्रिया के कारण होता है. 

2. ब्लीडिंग – आम पीरियड की तुलना में ज्यादा ब्लीडिंग और ब्लड क्लॉट्स (थक्के) आ सकते हैं. 

3. मतली और उल्टी – दवा के कारण शरीर में असुविधा महसूस हो सकती है. ऐसे में मतली और उल्टी जैसे समस्या हो सकती है. 

4. थकान और सिरदर्द  – शरीर में कमजोरी या सिर में दर्द होना. 

5. बुखार या ठंड लगना – हल्का बुखार या ठंड लग सकती है.

सावधानियां और सुझाव

अबॉर्शन पिल्स का यूज सिर्फ डॉक्टर की निगरानी में ही करना चाहिए. दवा लेने के बाद फॉलो-अप अपॉइंटमेंट जरूरी है, ताकि अपूर्ण गर्भपात या संक्रमण जैसी जटिलताओं का पता लगाया जा सके. अगर आप तुरंत प्रेग्नेंट नहीं होना चाहतीं, तो डॉक्टर की सलाह से दवा अपनाएं. वहीं अगर आपको उदासी या अपराधबोध महसूस हो, तो काउंसलिंग या सहायता समूह से मदद लें. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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हीट स्ट्रोक से कैसे हो जाती है किसी की मौत? प्रचंड गर्मी पड़ने से पहले जान लीजिए इलाज

हीट स्ट्रोक से कैसे हो जाती है किसी की मौत? प्रचंड गर्मी पड़ने से पहले जान लीजिए इलाज


गर्मी का मौसम कई लोगों के लिए सिर्फ तपिश और धूप लेकर आता है, लेकिन यह कभी-कभी जानलेवा भी साबित हो सकता है. जब शरीर बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है, तो उसे हीट स्ट्रोक कहा जाता है. हीट स्ट्रोक एक गंभीर स्थिति है जिसमें शरीर का तापमान अचानक बहुत बढ़ जाता है और अगर समय रहते इलाज न किया जाए तो यह व्यक्ति की मौत तक का कारण बन सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि हीट स्ट्रोक से किसी की मौत कैसे हो जाती है. हीट स्ट्रोक के लक्षण क्या हैं और इसे कैसे रोका जा सकता है. 

हीट स्ट्रोक से किसी की मौत कैसे हो जाती है?

जब शरीर का तापमान बहुत तेजी से बढ़ता है, तो शरीर अपने आप को ठंडा करने में असफल हो जाता है. इस स्थिति में सबसे पहले दिमाग, हार्ट और किडनी प्रभावित होते हैं. ज्यादा गर्मी दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है. इससे भ्रम, दौरे, कोमा या मानसिक नियंत्रण खोने जैसी स्थितियां पैदा होती हैं. शरीर को ठंडा रखने के लिए हार्ट ज्यादा काम करता है, जिससे दिल की धड़कन तेज और कमजोर हो सकती है. ज्यादा गर्मी के कारण अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं. अगर शरीर का तापमान लंबे समय तक बहुत ज्यादा रहता है और समय पर इलाज न किया जाए, तो ये जरूरी अंग पूरी तरह खराब हो जाते हैं. इसी कारण धीरे-धीरे शरीर का संतुलन बिगड़ता है और मौत हो जाती है. 

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हीट स्ट्रोक के लक्षण

हीट स्ट्रोक का सबसे पहला और प्रमुख लक्षण शरीर का बहुत ज्यादा गर्म होना है. इसके अलावा अन्य लक्षण भी दिखाई देते हैं. जैसे मानसिक बदलाव, भ्रम, बेचैनी, अस्पष्ट वाणी, दौरे या कोमा,  कभी स्किन गर्म और सूखी, कभी ज्यादा पसीना आ सकता है, पेट दर्द या उल्टी महसूस होना, स्किन का लाल होना और तेज धड़कन,सिरदर्द और तेज सांसें. अगर कोई व्यक्ति इन लक्षणों से पीड़ित है, तो तुरंत डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए. 

हीट स्ट्रोक से बचाव के उपाय

1. ढीले-ढाले और हल्के कपड़े पहनें. 

2. धूप से बचाव करें. टोपी, चश्मा और सनस्क्रीन लगाएं. 

3. ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं. 

4. खड़े वाहन में किसी को अकेला न छोड़ें. 

5. दिन के गर्म समय में भारी एक्टिविटी से बचें. 

6. धीरे-धीरे गर्म मौसम के लिए शरीर को अनुकूल बनाएं. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या आप भी जल्दी में रहते हैं हर वक्त? डॉक्टरों ने बताया कैसे यह आदत दिल और पेट पर डालती है असर

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अचानक से गिरने लगा है आपका भी वजन, कहीं शरीर में ये बीमारी तो नहीं?

अचानक से गिरने लगा है आपका भी वजन, कहीं शरीर में ये बीमारी तो नहीं?


शरीर का वजन सीधा हमारी हेल्थ को इंडिकेट करता है. शरीर का वजन का बढ़ना कई हेल्थ प्रॉब्लम का रिस्क पैदा करता है. साथ ही, इसका कम होना और भी चिंताजनक साबित होता है. वेट लूज करने के लिए जिम जाना, घर पर ही एक्सरसाइज करना या जॉगिंग करना, लोग अलग-अलग तरीका अपनाते रहते हैं. हालांकि, बिना एक्सरसाइज या जॉगिंग किए ही वजन घट रहा है तो खतरनाक हो सकता है . अचानक वजन का घटना सेहत के लिए अच्छा संकेत नहीं होता. उसे सही समय पर पहचान लेना बहुत जरूरी है, वरना करना पड़ सकता है बड़ी बीमारी का सामना. आइए जानते हैं कैसे?

अचानक वजन बदलना क्यों है चिंता का विषय?

स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने वाली वेबसाइट हेल्थलाइन डॉट कॉम के अनुसार, हमारे शरीर मैं थायरॉएड ग्लैंड के ओवरएक्टिव होने के कारण वजन कम होने लगता है. ओवरएक्टिव थायरॉएड को हाइपरथायरायडिज्म भी कहते हैं, शरीर के मेटाबॉलिज्म को बहुत तेज कर देता है, जिससे वजन कम होना, घबराहट, और दिल की धड़कन तेज होने जैसे लक्षण दिखने लगते हैं. 

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अचानक शरीर दुबला होने का कारण 

बिना कोशिश किए अगर अचानक शरीर का वजन 6 से 12 महीने में शरीर के कुल वजन का 5% से अधिक कम हो जाए तो यह गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. आइए जानते हैं कि अचानक वजन कम होने के प्रमुख कारण क्या हैं?

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  • भूख पर भी पड़ता है असर

    अगर बिना किसी वजह खाना खाने का मन न करे, भूख लगना कम हो जाए तो इसे भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जिससे लोग अंजाने में खाना कम कर देते हैं.

  • डिप्रेशन, स्ट्रेस

    डिप्रेशन और स्ट्रेस जरूरत से ज्यादा तनाव लेने वाले लोग खाने में कम रुचि लेने लगते हैं, जिसकी वजह से उनका वजन कम होने लगता है. ज्यादा स्ट्रेस लेन से शरीर में जमा फैट से एनर्जी अब्जॉर्ब होने लगती है और इंसान का वजन घटने लगता है.

  • अल्कोहल की लत 

    जिन्हें शराब, सिगरेट और नशीली दवाओं का सेवन करने की आदत हो जाती है, वे लोग लंबे समय तक खाना भी खाना भूल जाते हैं, नशा करने से इम्यूनिटी पॉवर भी कमजोर हो जाती है जिससे वजन कम होने लगता है.

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बुखार आने पर झट से खा लेते हैं दवाई, शरीर के साथ नाइंसाफी तो नहीं कर रहे आप?

बुखार आने पर झट से खा लेते हैं दवाई, शरीर के साथ नाइंसाफी तो नहीं कर रहे आप?


बुखार आना बहुत आम बात है. मौसम बदलने, बहुत मेहनत करने या वायरल संक्रमण के कारण शरीर का तापमान कभी-कभी बढ़ जाता है. ऐसे में कई लोग सोचते हैं कि तुरंत पैरासिटामॉल या इबुप्रोफेन जैसी दवा खा लें, ताकि बुखार जल्दी उतर जाए, लेकिन क्या हर बार बुखार आने पर दवा लेना सही है, एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऐसा करना हमेशा सही नहीं होता है. दरअसल, बुखार हमारे शरीर का एक प्राकृतिक बचाव तंत्र है. जब कोई वायरस या बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करता है, तो हमारा शरीर अपने तापमान को बढ़ा कर उनसे लड़ता है. इसलिए हर बुखार को तुरंत दबाने की जरूरत नहीं होती है तो आइए जानते हैं कि बुखार में दवा लेना कब सही है, कब नहीं और इसके लिए क्या करना चाहिए. 

बुखार क्या है और क्यों आता है?

बुखार शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया है. हल्का बुखार (99-100°F) आमतौर पर नुकसान नहीं करता, बल्कि शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करता है. रिसर्च बताती है कि 100-102°F तक का हल्का बुखार शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करने में योगदान देता है. बुखार लगातार 103°F से ऊपर या तीन दिन से ज्यादा समय तक बने रहने पर ही डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है. 

हर बार दवा लेना क्यों गलत है?

लोग बुखार आते ही तुरंत दवा खा लेते हैं. इससे लिवर और किडनी पर असर पड़ सकता है. अगर बुखार किसी गंभीर बीमारी जैसे डेंगू, मलेरिया या वायरल इंफेक्शन की वजह से है, तो सिर्फ बुखार उतारने से बीमारी ठीक नहीं होगी. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 60 प्रतिशत लोग बिना प्रिस्क्रिप्शन दवा लेते हैं. इससे दवा का असर कम हो सकता है और साइड इफेक्ट्स का खतरा बढ़ जाता है. 

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बुखार में दवा लेना कब सुरक्षित है?

हल्का बुखार (99-101°F) में अगर कोई गंभीर लक्षण नहीं हैं जैसे ज्यादा थकान, सांस लेने में दिक्कत या त्वचा पर दाने, तो एक या दो बार दवा लेना सुरक्षित माना जाता है.दवा सिर्फ लक्षणों को कम करती है, बीमारी की जड़ को नहीं. हल्का बुखार हो तो आराम करें, तरल पदार्थ पिएं और दवा सिर्फ असुविधा कम करने के लिए लें. 

बुखार आने पर क्या करें?

1. पानी पीते रहें – बुखार में शरीर से पानी जल्दी कम हो जाता है. पानी, नारियल पानी या ORS लें. 

2. हल्का खाना खाएं – खिचड़ी, सूप, दलिया खाएं. तले-भुने या भारी खाने से बचें. 

3. आराम करें – शरीर को रेस्ट की जरूरत है. ज्यादा मेहनत न करें. 

4. साफ-सफाई रखें – बार-बार हाथ धोएं और संक्रमण को फैलने से रोकें. 

5. थर्मामीटर से बुखार मापें – मलाशय, कान या माथे से तापमान नापें. 

बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने के नुकसान

1. बुखार की असली वजह छुप सकती है, जैसे मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड, हेपेटाइटिस 

2. ज्यादा दवा लेने से लिवर पर असर पड़ सकता है. 

3. अलग-अलग ब्रांड की दवाएं मिलाकर लेने से अनजाने में ओवरडोज हो सकता है. 

4. बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह ज्यादा खतरनाक हो सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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अपनी व्रत की थाली को ऐसे बनाएं हेल्दी, नहीं तो ज्यादा कैलोरी के चक्कर में बढ़ जाएगा वजन

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