कैसे होती है वर्चुअल अटॉप्सी, नॉर्मल पोस्टमॉर्टम से यह कितनी अलग?

कैसे होती है वर्चुअल अटॉप्सी, नॉर्मल पोस्टमॉर्टम से यह कितनी अलग?


भोपाल जल्द ही देश के उन शहरों में शामिल हो सकता है, जहां बिना चीर फाड़ के पोस्टमॉर्टम किया जाएगा. जापान और विकसित देशों की तर्ज पर भोपाल में वर्चुअल अटॉप्सी की शुरुआत की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. एम्स भोपाल में बिना चीर फाड़ के पोस्टमॉर्टम की यह आधुनिक तकनीक लागू करने को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है. इसके तहत शव को नुकसान पहुंचाए बिना मौत के कारणों की जांच की जाएगी और पूरी प्रक्रिया महज आधे घंटे में पूरी हो सकेगी. दरअसल एम्स भोपाल प्रबंधन ने वर्चुअल अटॉप्सी सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव भारत सरकार की स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी के सामने रखा है. इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे चुका है. अब इसे वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत किया गया है जिसके बाद इस प्रस्ताव को लेकर प्रतिक्रिया सकारात्मक रही है और जल्द फंड जारी होने की उम्मीद जताई जा रही है. मंजूरी मिलने पर एम्स भोपाल मध्य प्रदेश का पहला हॉस्पिटल होगा, जहां वर्चुअल अटॉप्सी की सुविधा शुरू होगी. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि वर्चुअल अटॉप्सी कैसे होती है और यह नॉर्मल पोस्टमॉर्टम से कितनी अलग है.

क्या होती है वर्चुअल अटॉप्सी?

वर्चुअल अटॉप्सी को वर्चुअल पोस्टमॉर्टम भी कहा जाता है. वहीं आमतौर पर पोस्टमॉर्टम में शरीर में कई कट लगाकर अंदरूनी हिस्सों की की जांच की जाती है, लेकिन वर्चुअल पोस्टमॉर्टम में ऐसा नहीं होता है. इसमें टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है. जिससे इसमें बॉडी को चीरने या काटने की जरूरत नहीं होती है. डॉक्टर इस टेक्नोलॉजी से ही सीटी स्कैन, एमआरआई, एक्स रे और डिजिटल इमेजिंग की मदद से शरीर के अंदरूनी हिस्सों की जांच करते हैं. यह एक तरह की रेडियोलॉजिकल जांच होती है, जिससे अंदरूनी चोट, खून के थक्के, फ्रैक्चर या अंगों में आई गड़बड़ी का पता लगाया जाता है.

वर्चुअल अटॉप्सी की रिपोर्ट होती है पूरी तरह डिजिटल

वर्चुअल अटॉप्सी से मिलने वाली रिपोर्ट पूरी तरह डिजिटल होती है, जिसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. अगर मौत का कारण किसी नस में ब्लॉकेज है तो रिपोर्ट में उस नस की 3डी इमेज होती है. इसमें पहले पूरे शरीर की इमेज फिर बॉडी पार्ट और लास्ट में उस नस की क्लोजअप इमेज होती है. वर्चुअल अटॉप्सी के ऐसे डिजिटल सबूत अदालत में भी मजबूत प्रमाण के तौर पर पेश किए जा सकते हैं.

नॉर्मल पोस्टमॉर्टम से कितनी अलग है यह टेक्नोलॉजी ?

नॉर्मल पोस्टमॉर्टम में शरीर को काटकर अंदरूनी अंगों की जांच की जाती है, जबकि वर्चुअल अटॉप्सी पूरी तरह टेक्नोलॉजी पर आधारित होती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार इसकी रिपोर्ट उतनी ही सटीक होती है जितनी नॉर्मल पोस्टमॉर्टम की. लेकिन इसमें समय कम लगता है और खर्च भी कम आता है. भारत में वर्चुअल अटॉप्सी की शुरुआत सबसे पहले 2021 में एम्स दिल्ली में हुई थी. इसके बाद शिलॉन्ग स्थित एनईआईजीआरआईएचएमएस में भी यह सुविधा शुरू की गई. इसके अलावा एम्स ऋषिकेश में भी इस टेक्नोलॉजी को लागू करने की मंजूरी दी जा चुकी है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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कॉस्मैटिक सर्जरी से मौत! 38 साल की इटैलियन इंफ्लूएंसर को आखिर हुआ क्या?

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आज के दौर और लाइफस्टाइल में खुद को सुंदर और बेहतर दिखाने की एक होड़ सी लग गई है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव और आधुनिक होती जीवनशैली की वजह से लोग अपने शरीर के साथ नए-नए प्रयोग कर रहे हैं. इन्हीं प्रयोगों में से एक है कॉस्मेटिक सर्जरी, जिसकी मदद से लोग खुद को सुंदर और आकर्षक दिखाने की कोशिश करते हैं. लेकिन हाल ही में हुई एक घटना ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, जिसमें कॉस्मेटिक सर्जरी के बाद इटली की एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की मौत हो गई. इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कॉस्मेटिक सर्जरी की सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है.

कौन थीं यूलिया बुर्तसेवा?

दरअसल, यूलिया बुर्तसेवा एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर थीं. उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram पर करीब 70,000 फॉलोअर्स थे. उनकी उम्र लगभग 38 साल थी. यूलिया इटली के नेपल्स में अपने पति ज्यूसेपे और छोटी बेटी के साथ रहती थीं. इंस्टाग्राम पर वह खुद को एक प्यार करने वाली मां के रूप में पेश करती थीं और अपनी बेटी के साथ रोजमर्रा के जीवन से जुड़े व्लॉग्स, हंसी-मजाक, खेलकूद, लाइफस्टाइल और पर्सनल हेल्थ केयर से जुड़ा कंटेंट शेयर करती थीं.

कॉस्मेटिक सर्जरी के लिए रूस पहुंची थीं यूलिया

करीब 4 जनवरी को यूलिया अपने देश इटली से निकलकर मास्को, रूस पहुंची थीं, जहां उन्हें कॉस्मेटिक सर्जरी करानी थी. सर्जरी से कुछ समय पहले भी उन्होंने सोशल मीडिया पर कंटेंट अपलोड किया था, जिसमें वह काफी खुश नजर आ रही थीं. लेकिन एक क्लिनिक में सर्जरी होने के बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी. इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

सर्जरी के बाद बिगड़ी हालत

रूस की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्लॉगर यूलिया बुर्तसेवा ने मास्को के एक क्लिनिक में कॉस्मेटिक सर्जरी करवाई थी. सर्जरी के बाद उनकी हालत गंभीर हो गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. जानकारी के अनुसार, यूलिया ने अपने नितंबों को बड़ा और सुडौल बनाने के लिए सर्जरी करवाई थी.

एनाफिलेक्टिक शॉक बना मौत की वजह

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि सर्जरी के दौरान यूलिया को एनाफिलेक्टिक शॉक आया, जो एक गंभीर एलर्जी प्रतिक्रिया होती है. यह प्रतिक्रिया दवाओं या एनेस्थेटिक के कारण हो सकती है. एनाफिलेक्टिक शॉक के दौरान ब्लड प्रेशर तेजी से गिर जाता है, शरीर पर चकत्ते या निशान पड़ सकते हैं और सूजन भी आ सकती है. यह एलर्जी स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है, जैसा कि इस मामले में हुआ.

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इन आदतों की वजह से कैंसर में बदल जाता है फैटी लिवर, जानें इसे रोकने का आसान तरीका

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Fatty Liver And Liver Cancer Risk:  फैटी लिवर बीमारी, जिसे हाल ही में मेटाबॉलिक डिसफंक्शन असोसिएटेड स्टीएटोटिक लिवर डिजीज कहा जाने लगा है, आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल हो चुकी है. जिसे कभी हल्की-फुल्की परेशानी माना जाता था, वह अब एक गंभीर खतरे के रूप में सामने आ रही है.  रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया में हर तीन में से एक एडल्ट इस बीमारी से प्रभावित है. लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने से यह समस्या होती है और शुरुआती दौर में इसके कोई खास लक्षण नहीं दिखते. लेकिन इलाज न मिलने पर यह लिवर में सूजन, सिरोसिस और यहां तक कि कैंसर तक का रूप ले सकती है.

क्यों है यह साइलेंट किलर?

अमेरिका के MD Anderson Cancer Center के मुताबिक, MASLD आगे चलकर MASH यानी मेटाबोलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टीटोहेपेटाइटिस नाम की गंभीर स्थिति में बदल सकती है. इस स्टेज पर लिवर में सूजन और सेल्स को नुकसान होने लगता है, जिससे लिवर फाइब्रोसिस और हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि ज्यादातर मरीजों को तब तक पता ही नहीं चलता, जब तक लिवर को गंभीर नुकसान नहीं पहुंच चुका होता.

आदतें फैटी लिवर को बना देती हैं और खतरनाक

डॉक्टरों और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, रोजमर्रा की कुछ आदतें फैटी लिवर को बिगाड़ देती हैं. इनमें- 

खराब खानपान

ज्यादा शुगर, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड जैसे कोल्ड ड्रिंक, चिप्स, बिस्किट और फास्ट फूड लिवर में फैट तेजी से बढ़ाते हैं. एक्सपर्ट मेडिटेरियन डाइट अपनाने की सलाह देते हैं, जिसमें सब्ज़ियां, साबुत अनाज, नट्स, ऑलिव ऑयल और मछली शामिल होती हैं. यह डाइट लिवर फैट कम करने में मददगार मानी जाती है.

खराब लाइफस्टाइल

लंबे समय तक बैठना और शारीरिक गतिविधि की कमी लिवर की फैट प्रोसेस करने की क्षमता को कमजोर कर देती है. डॉक्टर हफ्ते में कम से कम 150 मिनट मध्यम व्यायाम या 75 मिनट तेज एक्सरसाइज की सलाह देते हैं. लिफ्ट की जगह सीढ़ियां लेना या फोन पर बात करते हुए टहलना भी फायदेमंद हो सकता है.

पहले से मौजूद बीमारियां

मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल फैटी लिवर को तेजी से गंभीर बना सकते हैं. वजन कंट्रोल, अच्छी नींद और नियमित मेडिकल जांच से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

किन संकेतों पर रखें नजर?

फैटी लिवर को ‘साइलेंट डिजीज’ कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण साफ नजर नहीं आते. फिर भी कुछ संकेत हो सकते हैं जैसे लगातार थकान, पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में हल्की परेशानी, रूटीन टेस्ट में लिवर एंजाइम का बढ़ना या स्कैन में लिवर का बढ़ा हुआ दिखना. डॉक्टर कहते हैं कि हाई-रिस्क लोगों को नियमित स्क्रीनिंग जरूर करानी चाहिए.
अच्छी बात यह है कि शुरुआती स्टेज में फैटी लिवर काफी हद तक ठीक किया जा सकता है. शरीर का सिर्फ 5 से 10 फीसदी वजन कम करने से लिवर फैट में बड़ा सुधार देखा गया है. कई रिसर्च के अनुसार, कॉफी पीने से भी इसके खतरे में कमी आ सकती है, क्योंकि इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स लिवर को फायदा पहुंचाते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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