कितना खतरनाक है लग्जरी क्रूज पर फैला हंता वायरस, जिसने ले ली तीन लोगों की जान?

कितना खतरनाक है लग्जरी क्रूज पर फैला हंता वायरस, जिसने ले ली तीन लोगों की जान?


How Dangerous Is Hantavirus Infection: अटलांटिक महासागर में सफर कर रहे एक लग्जरी क्रूज पर संदिग्ध हंता वायरस इंफेक्शन ने चिंता बढ़ा दी है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, इस घटना में तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक मामले की पुष्टि हुई है और पांच अन्य संदिग्ध मामलों की जांच जारी है. एमवी होंडियस नाम के इस क्रूज पर फैले इस  ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर यह वायरस कितना खतरनाक है और इससे बचाव कैसे संभव है. 

क्या है हंता वायरस?

हंता वायरस कोई एक वायरस नहीं, बल्कि वायरस के एक समूह का नाम है, जो मुख्य रूप से चूहों जैसे ऐसे स्तनधारी जीवों में पाया जाता है जो भोजन को कुतरकर खाते हैं. यह इंसानों में सीधे नहीं फैलता, बल्कि इंफेक्टेड चूहों के मल, यूरिन या लार के सूखे कण जब हवा में मिल जाते हैं और सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं, तब इंफेक्शन होता है. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, यही इसका सबसे सामान्य फैलने का तरीका है. 

हजारों लोग होते हैं प्रभावित

दुनियाभर में हर साल इस वायरस से हजारों लोग प्रभावित होते हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के आंकड़ों के अनुसार, हेमोरेजिक फीवर विथ रीनल सिंड्रोम के करीब 1.5 लाख मामले हर साल सामने आते हैं, जिनमें से आधे से ज्यादा चीन में दर्ज होते हैं. वहीं अमेरिका में 1993 से 2023 के बीच करीब 890 मामलों की पुष्टि हुई है. हालांकि, इसका एक स्ट्रेन सियोल वायरस दुनिया के कई हिस्सों में पाया जाता है. 

इसे भी पढ़ें –Pregnancy Care in Summer: बढ़ती गर्मी में प्रेग्नेंट महिलाओं को हो सकती हैं कई दिक्कतें, ऐसें रखें अपना ख्याल

इस वायरस की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

इस वायरस की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसका कोई निश्चित इलाज नहीं है. डॉक्टर आमतौर पर मरीज के लक्षणों के आधार पर इलाज करते हैं, जिसमें ऑक्सीजन थेरेपी, वेंटिलेशन सपोर्ट और गंभीर मामलों में डायलिसिस तक की जरूरत पड़ सकती है. कई मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ता है, खासकर जब इंफेक्शन तेजी से लंग्स को प्रभावित करता है. 

कब आया था यह चर्चा में?

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में फरवरी 2025 में एक मामला चर्चा में आया था, जब ऑस्कर विजेता अभिनेता जीन हैकमैन की पत्नी बेट्सी अराकावा की मौत भी हंता वायरस से जुड़ी सांस की बीमारी के कारण हुई थी. जांच में पाया गया कि उनके घर के आसपास चूहों के घोंसले मौजूद थे, जिससे इंफेक्शन की आशंका बढ़ी. एक्सपर्ट के अनुसार, इस वायरस से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है चूहों जैसे जानवरों से दूरी बनाना. घर या काम करने की जगह पर चूहों के आने-जाने के रास्तों को बंद करना, सफाई के दौरान मास्क और दस्ताने पहनना, और गंदगी को सीधे हाथ से न छूना बेहद जरूरी है. 

क्रूज में क्यों होती है दिक्कत?

क्रूज जैसी बंद जगहों पर इस तरह के इंफेक्शन का खतरा इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि यहां सीमित स्थान में कई लोग एक साथ रहते हैं. ऐसे में अगर इंफेक्शन फैलता है, तो उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है.

इसे भी पढ़ें- Dopamine Burnout: क्या सब कुछ होते हुए भी लगता है खालीपन? जानिए क्या होता है ‘डोपामिन बर्नआउट’

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

क्या बिना बात रहता है बदन दर्द और खराब मूड, कहीं इस विटामिन की कमी से तो नहीं हो रहा ऐसा?

क्या बिना बात रहता है बदन दर्द और खराब मूड, कहीं इस विटामिन की कमी से तो नहीं हो रहा ऐसा?


Early Signs Of Vitamin D Deficiency: विटामिन डी की कमी अक्सर अचानक सामने नहीं आती, बल्कि धीरे-धीरे शरीर में असर दिखाती है. शुरुआत में बस हल्की थकान महसूस होती है, मूड ठीक नहीं रहता और शरीर पहले से ज्यादा भारी लगने लगता है. आमतौर पर लोग इसे रोजमर्रा की थकान या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार यही संकेत किसी गहरी कमी की ओर इशारा करते हैं. 

फंक्शनल न्यूट्रिशनिस्ट मुग्धा प्रधान, सीईओ और फाउंडर ऑफ iThrive ने TOI को बताया कि विटामिन डी सिर्फ एक विटामिन नहीं है, बल्कि यह शरीर में हार्मोन की तरह काम करता है. जब इसका स्तर कम होता है, तो शरीर पहले हल्के संकेत देता है और बाद में असर ज्यादा साफ दिखने लगता है. 

क्या होते हैं इसके कमी के संकेत?

ऐसी थकान जो आराम से भी दूर न हो, इस कमी का एक बड़ा संकेत हो सकती है. कई बार पूरी नींद लेने के बाद भी शरीर में ऊर्जा महसूस नहीं होती. मुग्धा प्रधान के अनुसार, कम विटामिन डी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और सेल्स में एनर्जी बनाने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है. यही वजह है कि व्यक्ति को हमेशा थकान महसूस होती है, जैसे शरीर पूरी तरह चार्ज ही नहीं हो पा रहा हो. 

बार-बार बीमार पड़ना भी संकेत

बार-बार बीमार पड़ना भी एक अहम संकेत है. छोटी-छोटी बीमारियां जल्दी-जल्दी होना और उनसे उबरने में ज्यादा समय लगना इस ओर इशारा करता है कि शरीर की इम्यूनिटी सही तरीके से काम नहीं कर रही. मुग्धा प्रधान बताती हैं कि विटामिन डी शरीर की इम्यून प्रतिक्रिया को संतुलित रखने में मदद करता है और इसकी कमी होने पर यह संतुलन बिगड़ जाता है.

इसे भी पढ़ें – Heart Fights Cancer: दिल धड़क रहा है यानी कैंसर से लड़ रहा है, नई स्टडी से जागी उम्मीद

मूड खराब होना भी पहचान

मूड में लगातार गिरावट भी इस कमी से जुड़ी हो सकती है. बिना किसी खास वजह के चिड़चिड़ापन, उदासी या दिमाग का ठीक से काम न करना जैसे लक्षण नजर आते हैं. विटामिन डी दिमाग में उन केमिकल्स को प्रभावित करता है, जो हमारे मूड को नियंत्रित करते हैं. यही कारण है कि धूप में समय बिताने से मन हल्का महसूस होता है. इसके अलावा शरीर में बिना वजह दर्द और कमजोरी भी दिख सकती है. मांसपेशियों में हल्का दर्द, कमर में जकड़न या ताकत कम होना ऐसे संकेत हैं, जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. समय के साथ यह समस्या हड्डियों को भी प्रभावित कर सकती है. 

लाइफस्टाइल भी जिम्मेदार

आज की जीवनशैली भी इस कमी को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है. लंबे समय तक घर या ऑफिस के अंदर रहना, धूप की कमी और संतुलित आहार न लेना इसके मुख्य कारण हैं. मुग्धा प्रधान सलाह देती हैं कि अगर थकान, मूड में बदलाव और शरीर में दर्द एक साथ महसूस हो रहे हों, तो इसे नजरअंदाज न करें और जांच करवाना बेहतर रहता है. इससे बचाव के लिए रोजाना कुछ समय धूप में बिताना जरूरी है, खासकर सुबह या शाम के समय. इसके साथ ही खानपान में पोषण से भरपूर चीजें शामिल करनी चाहिए. हालांकि, किसी भी तरह के सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.

इसे भी पढ़ें –Pregnancy Care in Summer: बढ़ती गर्मी में प्रेग्नेंट महिलाओं को हो सकती हैं कई दिक्कतें, ऐसें रखें अपना ख्याल

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

अचानक होने वाले कमर दर्द को मान रहे हैं नॉर्मल? कहीं यह किडनी स्टोन तो नहीं!

अचानक होने वाले कमर दर्द को मान रहे हैं नॉर्मल? कहीं यह किडनी स्टोन तो नहीं!


What Causes Sudden Lower Back Pain: अचानक कमर के निचले हिस्से में तेज दर्द होना आम बात लग सकती है. अक्सर लोग इसे लंबे समय तक बैठने, गलत तरीके से सोने या हल्की मोच समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन हर बार दर्द मांसपेशियों से जुड़ा हो, ऐसा जरूरी नहीं. कई बार यह शरीर का इशारा होता है कि अंदर कुछ और गंभीर हो रहा है, खासकर किडनी से जुड़ी समस्या. चलिए आपको बताते हैं कि एक्सपर्ट क्या कहते हैं. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

किडनी स्टोन यानी पथरी ऐसी ही एक स्थिति है, जो बिना किसी चेतावनी के सामने आ सकती है और दर्द इतना तेज होता है कि समझ पाना मुश्किल हो जाता है. डॉ. अंकुर भटनागर ने TOI को बताया कि अचानक शुरू होने वाला कमर दर्द कई बार किडनी या यूरिन नली में पथरी का संकेत होता है. यह दर्द एक जगह टिकता नहीं, बल्कि कमर से आगे की तरफ पेट या जांघ के पास तक फैल सकता है, जो इसकी सबसे बड़ी पहचान है.

डॉ. रितेश मोंगा भी बताते हैं कि यह दर्द अक्सर कमर के किनारे से शुरू होकर धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ता है.  यही वजह है कि इसे सामान्य कमर दर्द समझने की गलती हो जाती है, जबकि मांसपेशियों का दर्द आमतौर पर एक ही जगह रहता है.

क्या होती है दिक्कत?

असल में जब पथरी किडनी से निकलकर यूरिन के रास्ते में फंस जाती है, तो यूरिन का फ्लो रुक जाता है. इससे किडनी में दबाव बढ़ता है और तेज दर्द महसूस होता है. यह दर्द लहरों की तरह आता-जाता है, कभी बहुत तेज और कभी थोड़ा कम. डॉ. मोंगा के अनुसार, पथरी का आकार छोटा हो या बड़ा, दर्द की तीव्रता उससे हमेशा तय नहीं होती. 

ये होते हैं संकेत

इसके साथ कुछ और संकेत भी दिख सकते हैं, जैसे उल्टी आना, पेशाब के दौरान जलन, बार-बार पेशाब की इच्छा और कभी-कभी पेशाब में खून आना. कई लोग इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं और दर्द कम करने की दवाइयां लेकर काम चलाते रहते हैं. डॉ. भटनागर चेतावनी देते हैं कि बिना डॉक्टर की सलाह के ज्यादा दर्दनाशक दवाइयां लेने से किडनी को स्थायी नुकसान हो सकता है.

इसे भी पढ़ें – Heart Fights Cancer: दिल धड़क रहा है यानी कैंसर से लड़ रहा है, नई स्टडी से जागी उम्मीद

आजकल यह समस्या पहले से ज्यादा आम होती जा रही है, खासकर शहरों में रहने वाले लोगों में. कम पानी पीना, ज्यादा नमक या मीठा खाना, मोटापा और डायबिटीड जैसी बीमारियां इसका खतरा बढ़ाती हैं. भारत जैसे गर्म देश में डिहाइड्रेशन भी एक बड़ा कारण है, जहां शरीर को जरूरत से कम पानी मिल पाता है.

पहले की तुलना में इलाज आसान

अच्छी बात यह है कि अब इसका इलाज पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है. डॉ. भटनागर बताते हैं कि अब बिना चीरा लगाए आधुनिक तकनीकों से पथरी का इलाज संभव है. वहीं डॉ. मोंगा कहते हैं कि कई मामलों में लेजर तकनीक से भी बिना कट के पथरी हटाई जा सकती है. फिर भी सबसे जरूरी है समय पर ध्यान देना. अगर दर्द अचानक, तेज और जगह बदलने वाला हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। सही समय पर जांच और इलाज से बड़ी समस्या बनने से रोका जा सकता है.

इसे भी पढ़ें –Pregnancy Care in Summer: बढ़ती गर्मी में प्रेग्नेंट महिलाओं को हो सकती हैं कई दिक्कतें, ऐसें रखें अपना ख्याल

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

युवा महिलाओं में क्यों बढ़ रहा ब्रेस्ट कैंसर? ये शुरुआती लक्षण अक्सर किए जाते हैं नजरअंदाज

युवा महिलाओं में क्यों बढ़ रहा ब्रेस्ट कैंसर? ये शुरुआती लक्षण अक्सर किए जाते हैं नजरअंदाज


Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

बेबी क्रीम से मॉइश्चराइजर और पाउडर से ड्राई शैम्पू, एक्सपर्ट्स इसे लेकर क्यों दे रहे वॉर्निंग?

बेबी क्रीम से मॉइश्चराइजर और पाउडर से ड्राई शैम्पू, एक्सपर्ट्स इसे लेकर क्यों दे रहे वॉर्निंग?



Baby Cream As Moisturizer: बेबी क्रीम से मॉइश्चराइजर और पाउडर से ड्राई शैम्पू, एक्सपर्ट्स इसे लेकर क्यों दे रहे वॉर्निंग?



Source link

AIIMS की अनोखी स्पाइन सर्जरी तकनीक बनी दुनिया की पसंद, गंभीर मरीजों को मिल रही नई जिंदगी

AIIMS की अनोखी स्पाइन सर्जरी तकनीक बनी दुनिया की पसंद, गंभीर मरीजों को मिल रही नई जिंदगी


Spine Surgery Technique: आज के समय में चिकित्सा क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसी कड़ी में एक बड़ी सफलता सामने आई है. दिल्ली के All India Institute of Medical Sciences में विकसित एक खास सर्जरी तकनीक ने उन मरीजों के लिए नई उम्मीद पैदा कर दी है जो गंभीर रीढ़ की विकृति से परेशान थे. पहले ऐसे मरीजों के लिए इलाज बहुत मुश्किल और जोखिम भरा माना जाता था, लेकिन अब यह नई तकनीक उनकी जिंदगी बदल रही है. इस नवाचार ने न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी डॉक्टरों का ध्यान अपनी ओर खींचा है.  

सात साल की मेहनत से तैयार हुई तकनीक

यह नई सर्जरी तकनीक पिछले लगभग सात सालों में विकसित की गई है और इसे डॉक्टरों की एक टीम ने तैयार किया है. यह तकनीक असल में पोस्टेरियर वर्टिब्रल कॉलम रिसेक्शन (PVCR)”का एक बदला हुआ रूप है,  PVCR एक जटिल ऑपरेशन होता है, जिसका इस्तेमाल उन मरीजों के इलाज में किया जाता है जिनकी रीढ़ की हड्डी बहुत ज्यादा टेढ़ी या कठोर हो जाती है और इससे उनकी जिंदगी पर बुरा असर पड़ता है. इस नई तकनीक को वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ Dr Bhavuk Garg ने विकसित किया है. इस नई विधि में ऑपरेशन के दौरान रीढ़ के कुछ हिस्सों को अंत तक सुरक्षित रखा जाता है, जिससे सर्जरी के दौरान शरीर की स्थिरता बनी रहती है. इस वजह से पहले की तुलना में जटिलताओं का खतरा काफी कम हो जाता है और मरीज के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है.   All India Institute of Medical Sciences के डॉक्टरों का कहना है कि पिछले सात सालों में इस प्रक्रिया ने उन मरीजों के लिए नई उम्मीद जगाई है, जिन्हें पहले सर्जरी में बहुत ज्यादा जोखिम का सामना करना पड़ता था और जिनके पास इलाज के विकल्प भी सीमित थे. 

यह भी पढ़ेंः बच्चों में डायबिटीज पर सरकार का बड़ा कदम, फ्री स्क्रीनिंग और इलाज के लिए नई गाइडलाइन जारी

मरीजों को मिल रहा बड़ा फायदा

गंभीर रीढ़ विकृति से पीड़ित मरीजों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है जैसे रीढ़ का टेढ़ा होना, लगातार दर्द, सांस लेने में परेशानी और सीधे खड़े न हो पाना. कई बार इसका असर उनके मानसिक और सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है. लेकिन इस नई तकनीक के जरिए सर्जरी कराने के बाद मरीजों की हालत में काफी सुधार देखा गया है. जो लोग पहले चलने फिरने या सामान्य काम करने में असमर्थ थे, वे अब फिर से स्कूल, काम और सामान्य जीवन में लौट पा रहे हैं. परिवार के लोगों के अनुसार यह बदलाव उनके लिए जिंदगी बदल देने वाला साबित हुआ है.  एक वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ ने बताया, “पहले इन सर्जरी से लोग डरते थे, क्योंकि इसमें बड़े न्यूरोलॉजिकल या जानलेवा जोखिम हो सकते थे. लेकिन अब बेहतर तकनीक और अनुभव की वजह से इसके नतीजे काफी अच्छे हो गए हैं.” 

विदेशों में भी बढ़ी मांग और पहचान

एम्स द्वारा विकसित इस तकनीक को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल रही है. विदेशों के स्पाइन सर्जन भी इस विधि में रुचि दिखा रहे हैं और इसे अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक जटिल स्पाइन बीमारियों के इलाज में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो रही है. इससे भारत की चिकित्सा क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है और देश उन्नत स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में मजबूत स्थिति बना रहा है.

यह भी पढ़ेंः लू लगने से पहले ये संकेत देता है हमारा शरीर, भूलकर भी न करें नजरअंदाज

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

YouTube
Instagram
WhatsApp