छिपा हुआ खतराः  क्या आप भी पी रहे हैं बीमारी? लिक्विड कैलोरी  धीरे-धीरे कर रहा शरीर को बर्बाद

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GLP-1 दवाएं कितनी खतरनाक? हेल्थ मिनिस्ट्री ने कहा- बिना डॉक्टर की सलाह दवा बेची तो खैर नहीं

GLP-1 दवाएं कितनी खतरनाक? हेल्थ मिनिस्ट्री ने कहा- बिना डॉक्टर की सलाह दवा बेची तो खैर नहीं


Risks Of Using GLP-1 Drugs Without Prescription: वजन घटाने वाली दवाओं को लेकर देश में बढ़ती चिंता के बीच केंद्र सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है. GLP-1 आधारित वेट लॉस दवाओं की अनधिकृत बिक्री और प्रचार को रोकने के लिए ड्रग्स कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने निगरानी और कड़ी कर दी है. सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद दवा सप्लाई चेन में ट्रांसपेरेंसी और एथिकल प्रैक्टिस को सुनिश्चित करना है. 

स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्या कहा?

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हाल के दिनों में इन दवाओं के कई जेनेरिक वर्जन बाजार में आ गए हैं, जिसके बाद इनकी उपलब्धता तेजी से बढ़ी है. अब ये दवाएं रिटेल मेडिकल स्टोर्स, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, होलसेलर्स और यहां तक कि वेलनेस क्लीनिक्स में भी आसानी से मिलने लगी हैं. मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि बिना डॉक्टर की निगरानी के इनका इस्तेमाल गंभीर साइड इफेक्ट्स और स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है. 

इसी स्थिति को देखते हुए ड्रग्स कंट्रोलर ने राज्य स्तर के नियामकों के साथ मिलकर कार्रवाई शुरू कर दी है. इसका उद्देश्य फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकना और इन दवाओं की अवैध बिक्री पर लगाम लगाना है.

पहले जारी की गई थी एडवाइजरी

इससे पहले 10 मार्च को सरकार ने सभी दवा कंपनियों को एक विस्तृत एडवाइजरी भी जारी की थी, जिसमें साफ तौर पर कहा गया था कि किसी भी तरह के भ्रामक विज्ञापन या अप्रत्यक्ष प्रचार पर रोक लगाई जाए. खासतौर पर ऐसे प्रमोशन पर ध्यान दिया गया है, जो लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने के लिए प्रेरित कर सकते हैं. सरकार ने हाल के हफ्तों में अपनी कार्रवाई को और तेज कर दिया है. अलग-अलग राज्यों में करीब 49 जगहों पर निरीक्षण और ऑडिट किए गए हैं, जिनमें ऑनलाइन फार्मेसी के वेयरहाउस, दवा विक्रेता, होलसेलर और स्लिमिंग क्लीनिक्स शामिल हैं. इन जांचों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कहीं भी नियमों का उल्लंघन न हो रहा हो.

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लोगों के लिए भी सलाह

स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है. मंत्रालय के मुताबिक, बिना मेडिकल सुपरविजन के इन दवाओं का इस्तेमाल गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है. इसलिए जरूरी है कि इनका उपयोग सिर्फ योग्य डॉक्टर की सलाह से ही किया जाए. भारत में इन दवाओं को इस्तेमाल करने की अनुमति है, लेकिन इसके लिए सख्त शर्तें लागू हैं. इन्हें केवल एंडोक्राइनोलॉजिस्ट या इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट द्वारा ही प्रिस्क्राइब किया जा सकता है, और कुछ मामलों में कार्डियोलॉजिस्ट भी इसकी सलाह दे सकते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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गर्दन के पीछे बनने लगे हैं काले-काले घेरे, समझ लीजिए खराब होने लगा है शरीर का यह पार्ट

गर्दन के पीछे बनने लगे हैं काले-काले घेरे, समझ लीजिए खराब होने लगा है शरीर का यह पार्ट


हम में से कई लोग अक्सर गर्दन पर काले या मखमली जैसे निशान को सिर्फ गंदगी समझकर रगड़ देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सिर्फ गंदगी नहीं बल्कि आपके शरीर में चल रही किसी बड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता है. अगर यह निशान साफ करने पर भी नहीं हटते हैं, तो इसे अनदेखा करना खतरनाक साबित हो सकता है.  यह इस बात का शुरुआती संकेत हो सकते है कि आपके शरीर का कोई पार्ट खराब होने लगा है. तो आइए जानते हैं कि गर्दन पर काले निशान क्यों आते हैं,  इसे कैसे कंट्रोल किया जा सकता है और  ये शरीर के किस पार्ट के खराब होने का संकेत है. 

गर्दन पर काले निशान क्यों होते हैं?

गर्दन के पीछे या साइड में काले, मोटे या मखमली धब्बे अचानक दिखाई दे सकते हैं. इसका कारण सिर्फ गंदगी नहीं बल्कि शरीर में हार्मोन, ब्लड शुगर या वजन से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं. अगर यह निशान धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं या साफ करने के बावजूद नहीं हट रहे, तो इसे गंभीरता से लें. 

गर्दन पर काले निशान किन बीमारियों का संकेत हो सकते हैं?

1. इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance) – गर्दन पर काले और मखमली धब्बे सिर्फ त्वचा की समस्या नहीं होते, बल्कि ये अक्सर शरीर में चल रही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी होते हैं. सबसे आम कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस है. जब शरीर इंसुलिन का सही यूज नहीं कर पाता, तो ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने लगता है, जिससे गर्दन और शरीर के अन्य हिस्सों पर काले धब्बे दिखाई देने लगते हैं. इसके साथ ही वजन बढ़ना, थकान या भूख में बदलाव जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं. अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज का कारण बन सकता है. 

2. टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) – टाइप 2 डायबिटीज में लगातार बढ़े हुए ब्लड शुगर के कारण त्वचा पर बदलाव आ सकते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में Acanthosis Nigricans कहा जाता है. यह मुख्य रूप से गर्दन, बगल, कोहनी और जांघों के आसपास दिखता है. जिन लोगों के परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, उन्हें इन संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए. 

3. हार्मोनल असंतुलन – हार्मोनल असंतुलन भी काले निशानों का कारण बन सकता है. थायराइड की समस्या या पीसीओएस जैसी स्थिति में त्वचा का रंग गहरा हो जाता है. महिलाओं में अनियमित पीरियड्स, बाल झड़ना और वजन बढ़ना इसके साथ अक्सर दिखता है.

4. मोटापा और मेटाबोलिक सिंड्रोम – मोटापा और मेटाबोलिक सिंड्रोम भी गर्दन पर काले निशानों से जुड़े हैं. ज्यादा वजन शरीर में इंसुलिन स्तर को बढ़ा देता है, जिससे स्किन में मोटे और मखमली धब्बे बन जाते हैं. अगर पेट के आसपास भी चर्बी जमा हो रही है, तो यह संकेत है कि लाइफस्टाइल में बदलाव करना जरूरी है. 

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गर्दन के काले निशानों को कैसे ठीक करें?

1. लाइफस्टाइल में बदलाव – नियमित एक्सरसाइज करें, हेल्दी और संतुलित आहार लें, तनाव कम करें और नींद पूरी लें, स्मोकिंग और तंबाकू का सेवन कम करें. 

2.  प्री डायबिटीज के लक्षण नियंत्रित करें – डायबिटीज में सिर्फ गर्दन पर काले निशान नहीं बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों पर भी असर होता है. वजन, ब्लड शुगर और हार्मोन स्तर पर ध्यान दें. 

3. थायराइड और हार्मोन जांच – स्किन पर पीले, लाल या भूरे धब्बे खुजली या जलन के साथ दिखें, तो थायराइड या हार्मोनल असंतुलन की संभावना होती है. 

4. डॉक्टर से सलाह लें – अगर गर्दन, कंधे या कमर पर मखमली स्किन दिखे, तो यह इंसुलिन की मात्रा बढ़ने का संकेत हो सकता है. समय पर डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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सावधान! ‘Ozempic Face’ बना रहा युवाओं को समय से पहले बूढ़ा, कहीं आप भी तो नहीं हैं शिकार?

सावधान! ‘Ozempic Face’ बना रहा युवाओं को समय से पहले बूढ़ा, कहीं आप भी तो नहीं हैं शिकार?


Why Gen Z Is Obsessed With Fast Weight Loss: आज सोशल मीडिया पर कुछ मिनट स्क्रॉल करते ही एक चीज साफ नजर आती है, शार्प जॉलाइन, पतला शरीर और पहले-और-बाद वाले ट्रांसफॉर्मेशन, जो मानो रातों-रात हो गए हों. धीरे-धीरे यह ट्रेंड खासकर जेन-जी  के बीच बॉडी इमेज को बदल रहा है. अब सिर्फ अच्छा दिखना ही नहीं, बल्कि जल्दी रिजल्ट पाना भी एक बड़ा लक्ष्य बन गया है. नई पीढ़ी ऐसे दौर में बड़ी हुई है जहां फिल्टर, एडिटिंग और इंस्टेंट रिजल्ट्स आम बात हैं. यही वजह है कि अब वजन घटाने को लेकर भी सोच बदल गई है. डॉक्टरों के मुताबिक, युवा अब पहले से ज्यादा तेजी से बदलाव चाहते हैं. इसी के चलते Ozempic जैसी दवाओं और फास्ट वेट लॉस ट्रेंड्स की लोकप्रियता बढ़ रही है, जो इस जल्दीबाजी को और बढ़ा रही है. 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

TOI Health से बातचीत में डॉ. अनमोल चुघ ने बताया  कि आजकल युवा मरीजों की सोच में बड़ा बदलाव आया है. Gen Z अब पहले से ज्यादा खुलकर कॉस्मेटिक प्रोसीजर के बारे में बात करते हैं, लेकिन उनमें तुरंत रिजल्ट पाने की चाह भी काफी बढ़ गई है. हालांकि, तेजी से वजन घटाने के अपने नुकसान भी हैं. कई मामलों में शरीर उस बदलाव के साथ तालमेल नहीं बैठा पाता. इसका नतीजा होता है ढीली त्वचा, चेहरे की बनावट में बदलाव और नई तरह की असुरक्षाएं. “Ozempic Face” जैसी समस्या सामने आ रही है, जिसमें तेजी से वजन घटने के कारण चेहरा अंदर धंसा हुआ और उम्र से ज्यादा ढीला दिखने लगता है.

लगातार बढ़ रही है दिक्कत

सोशल मीडिया भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रहा है. इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर लगातार दिखने वाली परफेक्ट बॉडी इमेज लोगों को तुलना करने पर मजबूर करती है. इसी वजह से युवा अब लिपोसक्शन, स्किन टाइटनिंग, फैट ट्रांसफर और “प्रीजुवेनेशन” जैसे ट्रीटमेंट्स की ओर जल्दी आकर्षित हो रहे हैं. डॉक्टरों के अनुसार, सिर्फ फिजिकल ही नहीं, बल्कि मेडिकल और मानसिक असर भी देखने को मिल रहे हैं. तेजी से वजन घटाने पर पोषण की कमी, मसल लॉस और हड्डियों पर असर पड़ सकता है. वहीं, लगातार तुलना और डिजिटल एक्सपोजर के कारण मानसिक तनाव और बॉडी इमेज से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ रही हैं.

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संतुलित और टिकाऊ तरीका

विशेषज्ञों का कहना है कि वेट लॉस के लिए संतुलित और टिकाऊ तरीका अपनाना ज्यादा जरूरी है. डाइट, एक्सरसाइज और सही लाइफस्टाइल ही लंबे समय तक असरदार साबित होते हैं. किसी भी मेडिकल या कॉस्मेटिक प्रक्रिया से पहले सही जानकारी और डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है.  Gen Z में तेजी से बदलती यह सोच दिखाती है कि अब सुंदरता के मायने बदल रहे हैं. लेकिन इस बदलाव के बीच यह समझना जरूरी है कि जल्दबाजी में लिया गया फैसला भविष्य में शरीर और मन दोनों पर असर डाल सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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आ गया कोरोना का ‘सुपर वेरिएंट’, क्या फेल हो जाएगी आपकी वैक्सीन? वैज्ञानिकों का बड़ा खुलासा

आ गया कोरोना का ‘सुपर वेरिएंट’, क्या फेल हो जाएगी आपकी वैक्सीन? वैज्ञानिकों का बड़ा खुलासा


Is BA.3.2 Covid Variant Dangerous: अमेरिका में कोविड-19 का एक नया वेरिएंट तेजी से फैल रहा है, जिसे BA.3.2 नाम दिया गया है.  साइंटिस्ट का कहना है कि यह वेरिएंट मौजूदा वैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षा को कुछ हद तक कमजोर कर सकता है. । यही वजह है कि इसे लेकर चिंता बढ़ रही है, भले ही अभी तक इसके गंभीर असर पूरी तरह सामने नहीं आए हैं.

यह नया वेरिएंट ओमिक्रॉन का ही एक रूप है, जिसे सबसे पहले 2024 में साउथ अफ्रीका में देखा गया था और बाद में 2025 में अमेरिका में भी इसकी पहचान हुई. इसके बाद यह धीरे-धीरे कई देशों में फैल गया और अब 20 से ज्यादा राज्यों में इसके संकेत मिल चुके हैं. खास बात यह है कि यह सिर्फ मरीजों में ही नहीं, बल्कि एयरपोर्ट के वेस्टवॉटर सैंपल्स में भी पाया गया है, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि इसका फैलाव दिखने से ज्यादा व्यापक हो सकता है.

कैसा है नया वायरस?

वैज्ञानिकों के मुताबिक BA.3.2 में स्पाइक प्रोटीन में करीब 70 से 75 बदलाव पाए गए हैं. यही स्पाइक प्रोटीन वायरस को इंसानी सेल्स में घुसने में मदद करता है. इन बदलावों की वजह से यह वेरिएंट ज्यादा तेजी से फैल सकता है और शरीर की इम्यूनिटी को भी चकमा दे सकता है. independent की रिपोर्ट के अनुसार, लैब में किए गए टेस्ट में यह भी सामने आया है कि मौजूदा कोविड वैक्सीन, जो JN.1 जैसे वेरिएंट्स के खिलाफ बनाई गई हैं, BA.3.2 के खिलाफ उतनी प्रभावी नहीं हो सकतीं. यही कारण है कि साइंटिस्ट भविष्य में वैक्सीन अपडेट करने की जरूरत पर जोर दे रहे हैं. 

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कितना खतरनाक है नया कोरोना?

हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी तक इस वेरिएंट से होने वाले मामलों में गंभीरता ज्यादा नहीं देखी गई है. कुछ मरीज अस्पताल में भर्ती जरूर हुए, लेकिन सभी ठीक हो गए. एक्सपर्ट का कहना है कि सिर्फ अस्पताल में केस मिलने से यह साबित नहीं होता कि यह वेरिएंट ज्यादा खतरनाक है. फिर भी, एक्सपर्ट सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं.कोविड अब एंडेमिक बन चुका है, यानी यह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और समय-समय पर नए वेरिएंट सामने आते रहेंगे.

हर बार वायरस में बदलाव होता है, जिससे उसके फैलने या बचने की क्षमता बदल सकती है. हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि इंफेक्शन को फैलने से रोकना ही सबसे जरूरी है. जितना कम वायरस फैलने का मौका मिलेगा, उतना ही कम वह नए रूप में बदल पाएगा. इस बीच, फ्लू और RSV जैसी अन्य सांस से जुड़ी बीमारियां भी बढ़ रही हैं, लेकिन कोविड का खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है. 

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धोखा दे रही आपकी हेल्दी डाइट! सब सही करने के बाद भी क्यों फूल रहा शरीर? जानें चौंकाने वाली वजह

धोखा दे रही आपकी हेल्दी डाइट! सब सही करने के बाद भी क्यों फूल रहा शरीर? जानें चौंकाने वाली वजह


Why Am I Gaining Weight On Healthy Diet: आप हेल्दी खाना खा रहे हैं, जंक फूड से दूर हैं और एक्टिव भी रहते हैं, फिर भी वजन बढ़ रहा है? ऐसे में हमारे मन में सवाल आता है कि ऐसा क्यों होता है? यह सवाल आजकल कई लोगों को परेशान करता है. अक्सर लगता है कि सारी कोशिशों के बावजूद शरीर साथ नहीं दे रह.  लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यह सिर्फ कैलोरी या मेहनत का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे शरीर की जटिल मेटाबॉलिक प्रक्रिया काम करती है.

एक्सपर्ट बताते हैं कि कई बार शरीर खुद को नई परिस्थितियों के हिसाब से ढाल लेता है. जब लंबे समय तक कम कैलोरी ली जाती है, तो शरीर अपनी ऊर्जा बचाने लगता है. इसे मेटाबॉलिक अडैप्टेशन कहा जाता है. यानी शरीर पहले की तुलना में कम कैलोरी जलाने लगता है. ऐसे में वही डाइट, जो पहले वजन घटाने में मदद करती थी, अब वजन को बढ़ाने या स्थिर रखने लगती है.

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 इंसुलिन रेजिस्टेंस भी एक बड़ा कारण

इसके अलावा इंसुलिन रेजिस्टेंस भी एक बड़ा कारण हो सकता है. इंसुलिन सिर्फ ब्लड शुगर को ही नहीं, बल्कि शरीर में फैट स्टोर करने की प्रक्रिया को भी नियंत्रित करता है। जब शरीर इंसुलिन के प्रति संवेदनशील नहीं रहता, तो इंसुलिन का स्तर बढ़ जाता है और शरीर फैट को जलाने के बजाय जमा करने लगता ह. यह स्थिति उन लोगों में भी देखी जा सकती है, जो बाहर से पूरी तरह हेल्दी डाइट ले रहे होते हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

डॉ. मोइनुद्दीन ने TOI को बताया कि एक और अहम भूमिका लेप्टिन हार्मोन की होती है, जो दिमाग को यह संकेत देता है कि पेट भर गया है लेकिन जब शरीर में लेप्टिन रेजिस्टेंस हो जाता है, तो यह संकेत सही तरीके से काम नहीं करता. नतीजा यह होता है कि व्यक्ति बिना महसूस किए जरूरत से थोड़ा ज्यादा खाने लगता है, जो धीरे-धीरे वजन बढ़ाने का कारण बनता है. हार्मोनल असंतुलन भी वजन बढ़ने के पीछे बड़ी वजह हो सकता है. जैसे हाइपोथायरायडिज्म में मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, PCOS महिलाओं में फैट स्टोरेज को प्रभावित करता है और कशिंग सिंड्रोम में बढ़ा हुआ कोर्टिसोल शरीर में चर्बी जमा करने लगता है. ये सभी स्थितियां वजन बढ़ने को आसान बना देती हैं.

हेल्दी खाने से भी बढ़ता है वजन

कई बार हम यह भूल जाते हैं कि हेल्दी खाना भी ज्यादा मात्रा में लेने पर वजन बढ़ा सकता है. ड्राई फ्रूट्स, फल, साबुत अनाज और स्मूदी पोषक जरूर होते हैं, लेकिन इनमें कैलोरी भी अधिक होती है. अगर इनका सेवन जरूरत से ज्यादा हो जाए, तो शरीर अतिरिक्त एनर्जी को फैट के रूप में स्टोर करने लगता है. सिर्फ खाना ही नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल भी इसमें अहम भूमिका निभाता है. कम नींद, ज्यादा तनाव और शरीर में सूजन जैसी स्थितियां मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती हैं. नींद की कमी से भूख बढ़ाने वाले हार्मोन एक्टिव हो जाते हैं, जबकि तनाव से कोर्टिसोल बढ़ता है, जो वजन बढ़ाने में मदद करता है.

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