मोबाइल और लैपटॉप की ब्राइट स्क्रीन से जल्दी थक जाता है ब्रेन, बच्चों में तेजी से बढ़ रही ये प्रॉब्लम
Children Screen Addiction: मोबाइल और लैपटॉप की ब्राइट स्क्रीन से जल्दी थक जाता है ब्रेन, बच्चों में तेजी से बढ़ रही ये प्रॉब्लम
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क्या यूरिन में झाग आना किडनी खराब होने का लक्षण?
यूरिन में झाग आना हमेशा किडनी फेल होने का मतलब नहीं होता है, लेकिन यह चेतावनी जरूर हो सकती है. कई बार तेज धार से पेशाब आना शरीर में पानी की कमी या ज्यादा प्रोटीन वाली डाइट के कारण भी अस्थाई रूप से झाग बन सकता है. लेकिन अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो इसे गंभीरता से लेना जरूरी है. एक्सपर्ट्स के अनुसार लंबे समय तक झागदार यूरिन दिखना किडनी की फिल्टरिंग क्षमता कमजोर होने का लक्षण हो सकता है.
किडनी खराब होने की शुरुआती लक्षण
अगर यूरिन में झाग के साथ हाथ-पैरों और चेहरे पर सूजन आना, थकान और कमजोरी महसूस होना, भूख कम लगना, डार्क या बदबूदार यूरिन आना, सांस फूलना स्किन में खुजली होना और उल्टी या फिर मतली जैसे लक्षण दिखाई दें तो यह आपकी किडनी खराब होने की शुरुआती लक्षण हो सकते हैं.
झाग आना और कौन सी बीमारियों का हो सकता है संकेत?
यूरिन में झाग आना कई बार सिर्फ किडनी नहीं बल्कि दूसरी बीमारियों की तरफ भी इशारा करता है. दरअसल यूरिन में ज्यादा झाग आना डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की ओर भी इशारा कर सकता है. इसके अलावा हार्ट से जुड़ी समस्याएं, प्रेगनेंसी, तनाव और यूरिन इन्फेक्शन के दौरान भी यूरिन में ज्यादा झाग दिखाई दे सकते हैं. इसके अलावा हेल्थ एक्सपर्ट्स यह भी बताते हैं कि शरीर में कोई गंभीर बीमारी पनप रही हो तो उसका पहला संकेत पेशाब से ही मिलता है. ऐसे में झागदार पेशाब आना, यूरिन का रंग गहरा पीला या भूरा होना, तेज बदबू और जलन होना या फिर यूरिन में ब्लड आना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो आपको तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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Does Paracetamol During Pregnancy Cause Autism: प्रेग्नेंसी के दौरान पैरासिटामोल लेने को लेकर हाल के दिनों में कई दावे सामने आए हैं. यहां तक कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेताओं ने भी यह कह दिया कि प्रेग्नेंसी में पैरासिटामोल लेने से बच्चों में ऑटिज़्म जैसी दिमागी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. लेकिन अब इस दावे पर बड़ा फैक्ट-चेक सामने आया है. चलिए आपको बताते हैं कि क्या सच में यह खतरनाक है या फिर इसको लेकर फेक दावों की बौछार लगा दी गई थी.
रिसर्च में निकला कोई खतरा नहीं
मेडिकल जर्नल The Lancet में प्रकाशित एक रिव्यू में साफ कहा गया है कि गर्भावस्था के दौरान पैरासिटामोल लेने से बच्चों में ऑटिज्म, एडीएचडी या आर्टिफिशियल डिसेबिलिटी का कोई क्लिनिकली महत्वपूर्ण खतरा नहीं बढ़ता. इस स्टडी में अब तक हुए रिसर्च की गहराई से रिव्यू की गई. रिसर्चर का कहना है कि पहले जो स्टडी पैरासिटामोल को दिमागी बीमारियों से जोड़ती थीं, उनमें कई तरह की खामियां थीं. इनमें डेटा कन्फ्यूज़न, गलत याददाश्त पर आधारित जानकारी और दूसरे हेल्थ फैक्टर्स का असर शामिल था, जिससे नतीजे भरोसेमंद नहीं माने जा सकते.
इस नई रिव्यू के मुताबिक, बच्चों में ऑटिज़्म या न्यूरोडेवलपमेंटल समस्याओं की वजह पारिवारिक और जेनेटिक फैक्टर्स ज्यादा हो सकते हैं. यानी एक ही परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी ऐसे लक्षण दिखना ज्यादा तर्कसंगत वजह है, न कि पैरासिटामोल का सीधा असर. रिसर्च में उन स्टडीज को ज्यादा अहमियत दी गई, जिनमें एक ही मां की दो प्रेग्नेंसी की तुलना की गई. एक में पैरासिटामोल लिया गया और दूसरी में नहीं. ऐसे स्टडी जेनेटिक्स और घर के माहौल जैसे फैक्टर्स को बेहतर तरीके से अलग कर पाते हैं.
तीन स्टेप में बांटा गया है
रिसर्चर ने पैरासिटामोल और प्रेग्नेंसी से जुड़े स्टडीज को तीन स्टेप्स में जांचा. पहले स्टेप में गर्भवती महिलाओं द्वारा पैरासिटामोल के इस्तेमाल से जुड़ी 4,147 स्टडी को देखा गया, जिनमें से 4,092 को इसलिए बाहर कर दिया गया क्योंकि उनके नतीजे इस विषय से सीधे तौर पर जुड़े नहीं थे. दूसरे स्टेप में 55 फुल टेक्स्ट रिसर्च पेपर्स की गहराई से रिव्यू की गई. इनमें से भी 12 स्टडी को डिजाइन की कमी, डेटा अधूरा होने या विषय से मेल न खाने की वजह से हटा दिया गया.
अंतिम स्टेप में 43 स्टडी को व्यवस्थित तरीके से रिव्यू किया गया. इनमें से 17 हाई क्वालिटी वाली रिसर्च को डिटेल स्टैटिक्स एनालिसिस के लिए चुना गया, जिसमें खासतौर पर भाई-बहनों की तुलना वाले स्टडीज को प्राथमिकता दी गई, ताकि जेनेटिक और पारिवारिक प्रभाव को अलग किया जा सके.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
स्टडी की सीनियर राइटर प्रोफेसर अस्मा खलील का कहना है कि बिना पुख्ता सबूत ऐसे दावे करना गर्भवती महिलाओं में बेवजह डर पैदा कर सकता है. मौजूदा साइंटफिक साक्ष्य इन दावों का समर्थन नहीं करते. एक्सपर्ट ने दोहराया है कि मौजूदा मेडिकल गाइडलाइंस के तहत डॉक्टर की सलाह से लिया गया पैरासिटामोल प्रेग्नेंसी में सुरक्षित माना जाता है, दर्द या बुखार जैसी स्थिति में यह अब भी एक भरोसेमंद विकल्प है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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Which Vegetable Helps Increase Height: लंबाई भले ही काफी हद तक जेनेटिक्स पर निर्भर करती हो, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सही पोषण के बिना शरीर का संतुलित विकास संभव नहीं है. खासकर ग्रोथ एज में हड्डियों, जोड़ों और मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए कुछ सब्ज़ियों का नियमित सेवन बेहद जरूरी होता है. चलिए आपको कुछ सब्जियों और फूड्स के बारे में बताते हैं, जो बच्चों की हाइट ग्रोथ में मददगार साबित होंगी.
हरी पत्तेदार
पालक, केल, पत्ता गोभी और अरुगुला जैसी हरी पत्तेदार सब्ज़ियां लंबाई बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं. इनमें कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे मिनरल्स पाए जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैंय साथ ही इनमें मौजूद विटामिन K बोन डेंसिटी बढ़ाने में सहायक माना जाता है, जो ग्रोथ के लिए जरूरी है.
केल
केल को सुपरफूड माना जाता है. इसमें कैल्शियम और विटामिन C अच्छी मात्रा में होता है, जो हड्डियों की मजबूती और शरीर के विकास को सपोर्ट करता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ग्रोथ एज में केल को डाइट में शामिल करने से हड्डियों का विकास बेहतर हो सकता है.
पत्ता गोभी और अरुगुला
पत्ता गोभी पाचन तंत्र को मजबूत करती है, जिससे शरीर पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से एब्ज़ॉर्ब कर पाता है. वहीं अरुगुला में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम हड्डियों की ग्रोथ और मजबूती में मदद करते हैं.
शकरकंद
शकरकंद विटामिन A से भरपूर होता है, जो हड्डियों की सेहत के लिए जरूरी माना जाता है. इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर गट हेल्थ को बेहतर बनाता है, जिससे शरीर को ग्रोथ से जुड़े पोषक तत्व सही तरह से मिल पाते हैं. आप इसे उचित मात्रा में डाइट में शामिल कर सकते हैं.
बीन्स और क्विनोआ
बीन्स पौधों से मिलने वाला अच्छा प्रोटीन और आयरन का स्रोत हैं, जो टिश्यू ग्रोथ में मदद करते हैं. वहीं क्विनोआ में मौजूद मैग्नीशियम और फॉस्फोरस हड्डियों की मजबूती को सपोर्ट करते हैं, जिससे लंबाई के विकास में मदद मिल सकती है. आप इसको डाइट में शामिल कर सकते हैं.
ध्यान रखने वाली बात
यह साफ है कि एक तय उम्र के बाद लंबाई बढ़ना संभव नहीं होता, लेकिन सही सब्ज़ियों से भरपूर डाइट हड्डियों को मजबूत बनाकर ग्रोथ को सपोर्ट जरूर करती है और लंबाई को बनाए रखने में मदद करती है. अगर लंबाई बढ़ाने या बच्चों की ग्रोथ को लेकर चिंता है, तो हरी पत्तेदार सब्जियों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. सही डाइट के साथ ये सब्जियां शरीर के विकास में के लिए जरूरी होती हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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Beer Allergy Symptoms In Adults: बियर के शौकीनों को अक्सर लगता है कि बियर में ज्यादातर पानी होता है, इसलिए इससे कोई नुकसान नहीं होगा. लेकिन सच यह है कि बियर में मौजूद कुछ तत्व और उसके साथ खाई जाने वाली चीजें मिलकर एलर्जी या गंभीर रिएक्शन का कारण बन सकती हैं. चलिए आपको बताते हैं कि किन चीजों को बियर के साथ खाने से बचना चाहिए, वरना इससे एलर्जी का खतरा रहता है.
गेहूं और जौ से बनी चीजें न खाएं
बियर में माल्टेड जौ का इस्तेमाल होता है. ऐसे में बियर के साथ ब्रेड, पिज़्ज़ा, पास्ता, बिस्कुट जैसी गेहूं, जौ से बनी चीजें खाने से एलर्जी का खतरा बढ़ सकता है. इससे खुजली, पेट दर्द, उल्टी या सांस लेने में दिक्कत हो सकती है.
यीस्ट वाले फूड से बचें
बियर में पहले से यीस्ट मौजूद होता हैय ऐसे में पिज़्ज़ा, बर्गर बन और बेकरी आइटम जैसे यीस्ट वाले फूड खाने से शरीर में रिएक्शन तेज हो सकता है, जिससे गैस, उल्टी और स्किन एलर्जी हो सकती है.
पैकेट वाले नमकीन और चिप्स न खाएं
फ्लेवर्ड चिप्स और प्रोसेस्ड स्नैक्स में मौजूद प्रिज़र्वेटिव और केमिकल बियर के साथ मिलकर पेट और स्किन से जुड़ी एलर्जी को बढ़ा सकते हैं.
ज्वार से बनी चीजें अवॉयड करें
कुछ बियर में ज्वार का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में ज्वार की रोटी या ज्वार से बने स्नैक्स खाने से कुछ लोगों में एलर्जी के लक्षण सामने आ सकते हैं.
बियर के साथ दूसरी शराब न मिलाएं
बियर के साथ व्हिस्की, रम या वोडका पीने से अल्कोहल इंटॉलरेंस के लक्षण तेज हो सकते हैं, जैसे लो ब्लड प्रेशर, उल्टी, चक्कर और सांस की परेशानी हो सकती है.
बियर से एलर्जी होना कम मामलों में होता है, लेकिन बियर के साथ गलत चीजें खाना कई बार गंभीर रिएक्शन का कारण बन सकता है. अगर शरीर बार-बार संकेत दे रहा है, तो बियर के साथ खाने वाली चीजों को बदलना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है.
एलर्जी के लक्षण क्या हो सकते हैं?
अगर बियर पीने के बाद ये लक्षण दिखें, तो सावधान हो जाना चाहिए-
कुछ मामलों में लक्षण तुरंत दिखते हैं और स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।
कहीं ये शराब से एलर्जी तो नहीं?
कई लोगों को लगता है कि उन्हें बियर से एलर्जी है, जबकि असल में उन्हें अल्कोहल इंटॉलरेंस होती है. इसमें शरीर शराब को सही तरीके से तोड़ नहीं पाता. ऐसे लोगों को थोड़ी सी शराब पीते ही नाक बंद होना, चेहरा लाल होना, उल्टी या लो ब्लड प्रेशर जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. इसका एक ही इलाज है शराब से पूरी तरह दूरी.
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