एक कटोरी भीगे चने खाने से कितना प्रोटीन मिलता है, जिम वालों के लिए कितनी बेस्ट ये डाइट?

एक कटोरी भीगे चने खाने से कितना प्रोटीन मिलता है, जिम वालों के लिए कितनी बेस्ट ये डाइट?


आमतौर पर जिन लोगों को अपनी स्ट्रेंथ बढ़ानी होती है या जो लोग जिम जा रहे होते हैं, वे अधिकतर महंगे-महंगे प्रोटीन शेक, कैप्सूल और पाउडर के भरोसे रहते हैं. मन में यही लगा रहता है कि जितना महंगा सप्लीमेंट, उतना जल्दी रिजल्ट. ऐसे में कई लोगों को यह पता नहीं होता कि प्रोटीन के लिए जिस चीज पर वे इतने पैसे खर्च कर रहे हैं, उसका एक बड़ा हिस्सा वे सिर्फ एक छोटी सी आदत अपनाकर भी हासिल कर सकते हैं.

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ऐसे लोगों को हर रोज एक कटोरा चना खाना चाहिए. यह कोई पुरानी दादी-नानी की बात नहीं है या फिर यूं ही नहीं कही जाती, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी मौजूद हैं. अगर आप भी अपनी ताकत बढ़ाना चाहते हैं या मसल्स बनाना चाहते हैं तो यह जानकारी आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है.  आइए आपको बताते हैं कि चने से कितना प्रोटीन मिलता है और इसे खाने के क्या-क्या फायदे हैं.

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एक कटोरी चने में कितना प्रोटीन होता है

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि चना प्रोटीन का सबसे बेहतरीन स्रोत माना जाता है. साथ ही इसमें मौजूद प्रोटीन आसानी से पच भी जाता है. वहीं जो लोग वजन बढ़ाना चाहते हैं, वे चने को गुड़ के साथ भी खा सकते हैं. बता दें कि 100 ग्राम भीगे हुए चने में करीब 15 से 17 ग्राम प्रोटीन होता है. अगर आप एक अच्छी कटोरी भरकर चने खाते हैं यानी करीब 150 से 200 ग्राम तो आपको एक बार में ही 20 से 25 ग्राम तक प्रोटीन मिल जाता है.यह उतना ही प्रोटीन है जितना कई महंगे प्रोटीन शेक में होता है. कई लोग वेट गेन करने, मसल्स को बेहतर बनाने और अपनी शारीरिक ताकत बढ़ाने के लिए चना, गुड़ और दूध का सेवन करते हैं. इसका एक कारण यह भी है कि इनमें कैल्शियम अच्छी मात्रा में मौजूद होता है. लेकिन चने की खासियत सिर्फ प्रोटीन की मात्रा नहीं है, एक्सपर्ट्स कहते हैं कि चने का प्रोटीन आसानी से पच जाता है यानी शरीर इसे जल्दी और अच्छे से सोख लेता है. यही वजह है कि जिम जाने वालों के लिए यह सबसे बेस्ट और सस्ती डाइट मानी जाती है. 

इसके अलावा चने का एक और फायदा यह बताया जाता है कि यह शरीर में जमा अतिरिक्त पानी को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे शरीर टाइट और फिट दिखता है. कैल्शियम के साथ-साथ चने में आयरन भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है. वहीं जब चने को गुड़ के साथ खाया जाता है तो चने में मौजूद आयरन की  absorption और भी ज्यादा बढ़ जाती है, जिससे शरीर को इसका बेहतर लाभ मिलता है. 

सिर्फ जिम वाले नहीं, हर किसी के लिए फायदेमंद है चना

चने के फायदे सिर्फ जिम जाने वालों तक सीमित नहीं हैं. जिन लोगों को अस्थमा की परेशानी है उनके लिए भी भीगे चने बहुत फायदेमंद होते हैं क्योंकि यह फेफड़ों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. कैल्शियम और आयरन दोनों एक साथ मिलने की वजह से यह खून की कमी यानी एनीमिया में भी काम आता है. 

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प्रीमैच्योर बेबी में अंधेपन का खतरा रोक सकती है शुरुआती आई स्क्रीनिंग, जानिए कैसे?

प्रीमैच्योर बेबी में अंधेपन का खतरा रोक सकती है शुरुआती आई स्क्रीनिंग, जानिए कैसे?


रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी एक ऐसी आंखों की बीमारी है, जो मुख्य रूप से प्रीमैच्योर बेबी में होती है. इसमें आंख के पीछे मौजूद रेटिना की रेड ब्लड सेल्स असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं. रेटिना वह हिस्सा होता है, जो रोशनी को पहचान कर दिमाग तक संदेश पहुंचाता है. अगर यह बीमारी गंभीर रूप ले ले, तो रेटिना अपनी जगह से अलग हो सकती है और बच्चे की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है. हालांकि शुरुआती चरण में इसका इलाज संभव है.

भारत में हर साल बड़ी संख्या में प्रीमैच्योर बच्चों का जन्म होता है. पहले जहां ऐसे बच्चों के बचने की संभावना कम होती थी, वहीं अब बेहतर देखभाल के कारण उनकी जान बचाई जा रही है, लेकिन सभी अस्पतालों में आंखों की जांच की सुविधा और निगरानी की व्यवस्था समान रूप से उपलब्ध नहीं है. यही वजह है कि विशेषज्ञ भारत में ROP को तीसरी महामारी के रूप में देख रहे हैं. यहां केवल बहुत कम वजन वाले ही नहीं, बल्कि 34 हफ्ते तक जन्मे या 2 किलो तक वजन वाले बच्चों में भी यह बीमारी देखने को मिल रही है.

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Published at : 12 Jun 2026 05:45 PM (IST)

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रात 11 बजे के बाद जागना पड़ सकता है भारी, महिलाओं की फर्टिलिटी पर पड़ सकता है असर

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Sleep Cycle For Women: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं घर, नौकरी और परिवार सब संभालते-संभालते खुद की नींद से सबसे ज्यादा समझौता करती हैं. रात को देर तक मोबाइल, काम या घर के काम और फिर सुबह जल्दी उठना. यह सिलसिला हर रोज चलता रहता है, लेकिन क्या आप जानती हैं कि यह अधूरी नींद सिर्फ थकान नहीं, बल्कि आपके पीरियड्स, आपके शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन का लेवल, शरीर में इंसुलिन कि कार्य क्षमता और मां बनने की क्षमता तक को नुकसान पहुंचा सकती है? डॉक्टरों  का कहना है कि रात 11 बजे से पहले सो जाना महिलाओं की सेहत के लिए बेहद जरूरी है और इसे नजरअंदाज करना धीरे-धीरे शरीर के अंदर कई परेशानियां पैदा करता है. 

नींद और हार्मोन्स का सीधा रिश्ता 

हमारा शरीर एक घड़ी की तरह काम करता है और नींद उस घड़ी की चाबी है. विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं के हार्मोंस और उनकी नींद का आपस में बहुत गहरा नाता है. आप रात में कुल कितने घंटे सोते हैं, यह तो जरूरी है ही. लेकिन आप किस समय पर सोते हैं, यह बात भी उतनी ही जरूरी है. साथ ही दिमाग का वही हिस्सा जो नींद और जागने के हार्मोन्स को कंट्रोल करता है, वही हिस्सा महिलाओं में ओवुलेशन यानी अंडे बनाने की प्रक्रिया को भी चलाता है. ओवुलेशन को शुरू करने वाला हार्मोन LH यानी Luteinizing Hormone गहरी नींद के दौरान बनता है. अगर नींद में बार-बार रुकावट आए तो LH का बनना कम हो जाता है जिससे पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं या ओवुलेशन छूट सकता है. 

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कम नींद से क्या-क्या हो सकता है जानकर चौंक जाएंगी

जब महिलाएं अच्छी नींद नहीं लेती हैं या गलत समय पर सोती हैं, तो इसका सीधा असर उनके उन हार्मोन्स पर पड़ता है जो मां बनने की क्षमता को संभालते हैं. यानी एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन, मेलाटोनिन, कोर्टिसोल, LH और FSH का संतुलन बिगड़ जाता है. इनमें से मेलाटोनिन हार्मोन महिलाओं के अंडों की क्वालिटी को अच्छा रखता है और उन्हें सुरक्षित रखता है, लेकिन नींद की कमी के कारण यह ठीक से नहीं बन पाता है. 

दूसरी तरफ, पर्याप्त नींद न मिलने से शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बहुत बढ़ जाता है, जिसे मुख्य रूप से तनाव का हार्मोन कहा जाता है. कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने के कारण दिमाग और ओवरी के बीच का आपसी संपर्क टूट जाता है, जिससे एलएच (LH) और एफएसएच (FSH) हार्मोन का बहाव रुक जाता है. ये दोनों हार्मोन अंडाशय में अंडों को विकसित करने और उन्हें सही समय पर बाहर निकालने के लिए जिम्मेदार होते हैं. सीधे शब्दों में कहें तो, कम सोने से तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन बढ़ते हैं और अंडों को सुरक्षित रखने वाले हार्मोन कम हो जाते हैं, जिससे महिलाओं को आगे चल कर कंसीव करने या प्रेगनेंसी में परेशानी आ सकती है.

महिलाओं को कितनी नींद लेनी चाहिए 

डॉक्टर्स के अनुसार, 7 से 8 घंटे की नींद महिलाओं की प्रजनन सेहत के लिए सबसे सही मानी जाती है.  American Society of Reproductive Medicine के एक अध्ययन में पाया गया कि जो महिलाएं इतने घंटे सोती थीं उनमें गर्भधारण की संभावना उन महिलाओं से काफी ज्यादा थी जो 7 घंटे से कम या 9 घंटे से ज्यादा सोती थीं. इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि रात 11 बजे तक जरूर सो जाए. 

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केरल में निपाह वायरस की दस्तक, जानें यह कैसे फैलता है और कितना खतरनाक?

केरल में निपाह वायरस की दस्तक, जानें यह कैसे फैलता है और कितना खतरनाक?


Nipah Outbreak in Kerala: केरल में निपाह वायरस का एक नया मामला सामने आया है‌. कोझिकोड में किए गए जांच में एक 45 वर्षीय व्यक्ति में निपाह वायरस की पुष्टि की गई है. यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने एहतियात कदम उठाए और उस आदमी के कांटेक्ट में आए लोगों की पहचान शुरू कर दी. मरीज का फिलहाल कोझिकोड मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि निपाह वायरस कैसे फैलता है और यह कितना खतरनाक है.

77 लोगों के कांटेक्ट में आया मरीज 

रिपोर्ट के अनुसार, राहत की बात यह है कि अभी तक मरीज के कांटेक्ट में आए 77 लोगों में से किसी में भी निपाह वायरस के कोई लक्षण दिखाई नहीं दिए. वहीं अधिकारियों के अनुसार, 77 लोगों में से 14 तो मरीज के परिवार के सदस्य, 5 दोस्त और कलीग और 58 स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं. बताया जा रहा है कि इनमें से 15 लोगों को अति-जोखिम वाली कैटेगरी में रखा गया है. 

क्या है निपाह वायरस? 

निपाह वायरस एक जेनेटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलता है. इसका मुख्य सोर्स फ्रूट वेट यानी फल खाने वाले चमगादड़ माने जाते हैं. यह वायरस पहली बार 1999 में मलेशिया और सिंगापुर में सामने आया था. इसके अलावा भारत, बांग्लादेश और दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ देशों में समय- समय पर इसका प्रकोप देखने को मिला है. 

कैसे फैलता है निपाह वायरस?

निपाह वायरस का इन्फेक्शन इंसानों में कई तरह से फैल सकता है, जैसे संक्रमित चमगादड़ों की लार, पेशाब या मल से दूषित फल खाने पर, कच्चा खजूर का रस पीने पर जो चमगादड़ के कांटेक्ट में आया हो, इन्फेक्टेड जानवरों खासकर सूअरों के कांटेक्ट में आने से, उसके अलावा इन्फेक्टेड मरीज की बॉडी फ्लुइड्स जैसे लार, खून या दूसरे स्राव के कांटेक्ट में आने पर यह वायरस फैलता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार संक्रमित मरीजों की देखभाल करने वाले लोगों में इसके इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है. 

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क्या है निपाह वायरस के लक्षण? 

इंफेक्शन के 4 से 14 दिन बाद इस वायरस के लक्षण दिखाई दे सकते हैं. शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे होते हैं. इसमें तेज बुखार, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, खांसी और गले में खराश, सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. ज्यादा खतरनाक मामलों में वायरस दिमाग तक पहुंच सकता है और ब्रेन इन्फ्लेमेशन का कारण बन सकता है. वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार निपाह वायरस से संक्रमित 40 से 75 प्रतिशत मरीजों की मौत हो सकती है.

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हार्ट और पेट में क्यों भर जाता है पानी? रोजाना की इन गलतियों से हो सकता है गंभीर नुकसान

हार्ट और पेट में क्यों भर जाता है पानी? रोजाना की इन गलतियों से हो सकता है गंभीर नुकसान


Why Does Fluid Build Up Around The Heart And Abdomen: शरीर में पानी की कमी होना जितना खतरनाक है, उतना ही खतरनाक शरीर के कुछ हिस्सों में जरूरत से ज्यादा पानी जमा होना भी हो सकता है. कई बार लोगों को लगता है कि पेट का अचानक फूलना या सांस फूलना सामान्य समस्या है, लेकिन यह शरीर में फ्लूइड जमा होने का संकेत भी हो सकता है. डॉक्टरों के अनुसार पेट और दिल के आसपास पानी भरना कई गंभीर बीमारियों की ओर इशारा करता है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.

किन लोगों को होती है पेट में पानी भरने की दिक्कत?

हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था Cleveland Clinic के अनुसार पेट में पानी भरने की स्थिति को एसाइटिस कहा जाता है. यह समस्या सबसे ज्यादा लिवर सिरोसिस के मरीजों में देखी जाती है. जब लिवर खराब होने लगता है, तो शरीर में नमक और पानी का संतुलन बिगड़ जाता है. धीरे-धीरे पेट के अंदर तरल पदार्थ जमा होने लगता है, जिससे पेट असामान्य रूप से बड़ा दिखाई देने लगता है. इसके अलावा तेजी से वजन बढ़ना, टखनों में सूजन, सांस लेने में दिक्कत, पेट दर्द और थकान जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं.

क्या होते हैं इसके कारण?

डॉक्टरों के मुताबिक कुछ रोजमर्रा की आदतें इस खतरे को बढ़ा सकती हैं. लंबे समय तक अत्यधिक शराब का सेवन, हेपेटाइटिस बी और सी जैसी बीमारियों का समय पर इलाज न कराना तथा लिवर की सेहत को लगातार नजरअंदाज करना सिरोसिस और आगे चलकर पेट में पानी भरने की वजह बन सकता है. रिसर्च में भी पाया गया है कि लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियां एसाइटिस के सबसे बड़े कारणों में शामिल हैं. 

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हार्ट में पानी भरना कितना खतरनाक?

वहीं हार्ट के आसपास पानी भरने की स्थिति को पेरिकार्डियल इफ्यूजन कहा जाता है. यह तब होता है जब दिल को घेरे रहने वाली थैली में जरूरत से ज्यादा तरल पदार्थ जमा हो जाता है. शुरुआत में इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं, लेकिन समस्या बढ़ने पर सीने में दर्द, सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना, चक्कर आना और अत्यधिक कमजोरी महसूस हो सकती है. Cleveland Clinic के अनुसार इंफेक्शन का इलाज टालना, गंभीर बीमारियों को नजरअंदाज करना और हार्ट, किडनी या लिवर से जुड़ी समस्याओं का समय पर उपचार न कराना पेरिकार्डियल इफ्यूजन का जोखिम बढ़ा सकता है. कुछ मामलों में यह स्थिति जानलेवा भी बन सकती है क्योंकि अतिरिक्त पानी दिल पर दबाव डालने लगता है.

किन चीजों को न करें इग्नोर?

डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर पेट तेजी से बढ़ रहा हो, अचानक वजन बढ़ रहा हो, सांस लेने में परेशानी हो रही हो या सीने में लगातार दर्द महसूस हो रहा हो तो तुरंत जांच करानी चाहिए. समय रहते पहचान और इलाज से इस समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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आपकी आंखें खराब कर रहीं किचन में रखी ये तीन चीजें, आज ही दिखा दें बाहर का रास्ता

आपकी आंखें खराब कर रहीं किचन में रखी ये तीन चीजें, आज ही दिखा दें बाहर का रास्ता


Kitchen Items That Can Damage Your Eyes: घर की रसोई में मौजूद कुछ चीजें आपकी आंखों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं. कई बार लोग इनका इस्तेमाल तो रोज करते हैं, लेकिन इनके संभावित नुकसान से अनजान रहते हैं. एक्सपर्ट के अनुसार कुछ केमिकल प्रोडक्ट्स और खराब तरीके से रखी गई चीजें आंखों में जलन, इंफेक्शन और यहां तक कि गंभीर चोट का कारण बन सकती हैं. अगर आप अपनी आंखों को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो किचन में मौजूद इन तीन चीजों पर विशेष ध्यान दें.

तेज केमिकल वाले किचन क्लीनर

किचन की सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाले ब्लीच, अमोनिया आधारित क्लीनर और अन्य मजबूत केमिकल्स आंखों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं. सफाई के दौरान इनकी कुछ बूंदें या छींटे आंखों में चले जाएं तो जलन, लालिमा, केमिकल बर्न और गंभीर नुकसान हो सकता है. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतें और संभव हो तो कम केमिकल वाले या सुरक्षित विकल्प चुनें. सफाई के दौरान दस्ताने और आंखों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें.

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एक्सपायर या गलत तरीके से रखे गए स्प्रे क्लीनर

कई घरों में किचन क्लीनिंग स्प्रे लंबे समय तक इस्तेमाल किए जाते हैं. एक्सपायर हो चुके या खुली जगह पर रखे स्प्रे क्लीनर के कण हवा में फैलकर आंखों में पहुंच सकते हैं. इससे आंखों में जलन, पानी आना और असहजता की समस्या हो सकती है. इसलिए समय-समय पर स्प्रे क्लीनर की एक्सपायरी डेट जांचें. खराब या पुराने उत्पादों को तुरंत हटाएं और इन्हें बच्चों की पहुंच से दूर रखें.

खुले में रखे मिर्च-मसाला पाउडर

लाल मिर्च, काली मिर्च और अन्य मसालों के महीन कण आंखों में पहुंचकर तेज जलन पैदा कर सकते हैं. खुले में रखे मसाले हवा के संपर्क में आने से अधिक आसानी से उड़ते हैं और आंखों तक पहुंच सकते हैं. मसालों को हमेशा एयरटाइट कंटेनर में रखें. मसाले इस्तेमाल करने के बाद हाथ अच्छी तरह धोएं और आंखों को छूने से बचें. यदि मसाले का कण आंख में चला जाए तो तुरंत साफ पानी से आंख धो लें.

आंखों की सुरक्षा है सबसे जरूरी

किचन में मौजूद ये चीजें छोटी लग सकती हैं, लेकिन लापरवाही की स्थिति में आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. इसलिए पुराने और एक्सपायर उत्पादों को समय पर हटाएं, केमिकल क्लीनर्स का सावधानी से इस्तेमाल करें और मसालों को सही तरीके से स्टोर करें. आपकी छोटी सी सावधानी आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ और सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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