चिकन या मटन… किस नॉनवेज से ज्यादा मिलता है प्रोटीन, हेल्थ के लिए क्या बेस्ट?

चिकन या मटन… किस नॉनवेज से ज्यादा मिलता है प्रोटीन, हेल्थ के लिए क्या बेस्ट?


Which Meat Is Better For Protein Intake: प्रोटीन हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है, लेकिन हर प्रोटीन स्रोत एक जैसा फायदेमंद नहीं होता. खासकर जब बात नॉन-वेज प्रोटीन की आती है, तो अक्सर यह सवाल उठता है कि चिकन बेहतर है या मटन. दोनों ही लोकप्रिय हैं, लेकिन सेहत के लिहाज से इनमें बड़ा फर्क माना जाता है. चलिए आपको बताते हैं कि आपके लिए कौन सा फायदेमंद माना जाता है. 

मटन में प्रोटीन के साथ फैट भी ज्यादा

अक्टूबर 2024 में आई एक स्टडी, जिसका ज़िक्र नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में मिलता है उसमें में हाई-फैट डाइट का असर चूहों पर देखा गया. इस रिसर्च में 60 एल्बिनो चूहों को अलग-अलग ग्रुप में बांटा गया और उनके वजन, कैलोरी इनटेक, ब्लड रिपोर्ट और लिवर की स्थिति का स्टडी किया गया. नतीजों में सामने आया कि जिन चूहों को मटन फैट दिया गया, उनमें कैलोरी इनटेक और वजन दोनों ज्यादा बढ़े. इसके अलावा ब्लड शुगर लेवल बढ़ा, ग्लूकोज़ टॉलरेंस खराब हुई और ट्राइग्लिसराइड्स, कोलेस्ट्रॉल व एलडीएल का स्तर भी ऊपर चला गया, जबकि एचडीएल कम पाया गया. लिवर से जुड़े एंजाइम भी बढ़े, जो लिवर पर निगेटिव असर का संकेत है. इन निष्कर्षों से यह साफ होता है कि मटन सिर्फ प्रोटीन ही नहीं, बल्कि फैट भी काफी मात्रा में देता है, जो लंबे समय तक नियमित सेवन में नुकसानदेह हो सकता है.

चिकन हल्का और लीन प्रोटीन

अब बात करते हैं चिकन की. हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, चिकन में कैलोरी की मात्रा उसके हिस्से पर निर्भर करती है. ब्रेस्ट में सबसे ज्यादा प्रोटीन होता है, इसके बाद थाई, विंग्स और ड्रमस्टिक आते हैं. इसके बावजूद चिकन को हाई-कैलोरी मीट नहीं माना जाता है.  नेशनल चिकन काउंसिल के अनुसार, चिकन एक लीन प्रोटीन है, यानी इसमें फैट की मात्रा कम होती है. इसमें कार्बोहाइड्रेट और फाइबर नहीं होते, जिससे यह उन लोगों के लिए भी बेहतर विकल्प बन जाता है, जिन्हें डाइट को लेकर सावधानी रखनी पड़ती है. इसके अलावा चिकन में सैचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है, इसलिए हार्ट से जुड़ी समस्याओं वाले लोगों के लिए इसे ज्यादा सुरक्षित माना जाता है.

सेहत के लिहाज से कौन बेहतर?

अगर दोनों की तुलना की जाए, तो साफ है कि नियमित सेवन के लिए चिकन, मटन से ज्यादा बेहतर विकल्प है. मटन कभी-कभार और सीमित मात्रा में लिया जाए तो ठीक है, लेकिन रोजमर्रा की डाइट में चिकन ज्यादा संतुलित और हल्का प्रोटीन देता है. यानी प्रोटीन के साथ सेहत को प्राथमिकता देनी हो, तो चिकन को प्राथमिकता मिलती है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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मैं डिनर के बाद रोजाना पीती हूं ग्रीन टी, जानें मेरी हेल्थ में कितना आया बदलाव?

मैं डिनर के बाद रोजाना पीती हूं ग्रीन टी, जानें मेरी हेल्थ में कितना आया बदलाव?


Benefits Of Green Tea At Night: अक्सर लोग डिनर के बाद या तो मोबाइल में उलझ जाते हैं या फिर कुछ देर बाद दोबारा खाने का मन बनाने लगते हैं. ऐसी स्थिति में डिनर के बाद ग्रीन टी पीने की आदत एक साधारण लेकिन असरदार विकल्प के रूप में देखी जा रही है. यह न तो किसी सख्त डाइट का हिस्सा है और न ही किसी बड़े फिटनेस लक्ष्य से जुड़ी हुई, लेकिन इसके कुछ छोटे फायदे जरूर सामने आते हैं.

मीठा या स्नैक खाने की तलब कम होती है

सबसे पहले, डिनर के बाद ग्रीन टी पीने से देर रात होने वाली बेवजह की भूख पर असर पड़ सकता है. गर्म पेय होने की वजह से यह दिमाग को यह संकेत देता है कि खाना खत्म हो चुका है. इससे मीठा या स्नैक खाने की आदत धीरे-धीरे कम हो सकती है, वह भी बिना किसी जबरदस्ती के.

पहले से ज्यादा सुकून

इसके अलावा, यह आदत शाम के समय को थोड़ा शांत बनाने में मदद कर सकती है. डिनर और सोने के बीच ग्रीन टी पीना एक छोटा सा ब्रेक बन जाता है, जो लगातार स्क्रीन देखने की आदत को भी कम कर सकता है. इससे दिन के अंत में मानसिक रूप से रिलैक्स महसूस किया जा सकता है.

डिनर की मात्रा पर भी ध्यान जाने लगा

डिनर की मात्रा पर भी इसका अप्रत्यक्ष असर देखा जाता है। जब लोगों को यह पता होता है कि खाने के बाद हल्का ग्रीन टी लिया जाएगा, तो वे अक्सर खाना धीरे और संतुलित मात्रा में खाते है.  इससे ओवरईटिंग की संभावना कम हो सकती है. इससे यह सोच भी खत्म हो जाती है कि यह सोच भी खत्म हो गई कि सोने से पहले यही आखिरी मौका है खाने का. 

नींद के पैटर्न में हल्का बदलाव दिखा

हालांकि, नींद के मामले में इसका असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता. कुछ लोगों को डिनर के बाद ग्रीन टी पीने से हल्कापन महसूस होता है, जबकि कुछ मामलों में अगर चाय बहुत तेज या देर रात पी जाए, तो नींद आने में दिक्कत भी हो सकती है. इसलिए समय और मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है.

छोटा-सा रिचुअल बनना

सबसे अहम बात यह रही कि अगर आप डिनर के बाद ग्रीन टी का सेवन करते हैं, तो यह दिन को समेटने का एक निजी तरीका बन जाता है. जिसमें न कोई नियम था, न अनुशासन का दबाव. बस एक छोटी-सी आदत, जो व्यस्त दिनों में भी स्थिरता का एहसास आपको महसूस हो सकती है.

कुल मिलाकर, डिनर के बाद ग्रीन टी पीना कोई चमत्कारी उपाय नहीं है, लेकिन यह एक सधी हुई रूटीन बनाने में मदद कर सकता है. यह आदत शाम के समय को व्यवस्थित करती है, अनावश्यक खाने से बचाव करती है और दिन के अंत में एक हल्का, संतुलित रूटीन तैयार करती है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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सिर्फ पुरुषों में दिखते हैं किडनी डैमेज के ये लक्षण, 99% लोग कर देते हैं इग्नोर

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Kidney Health In Men: आजकल कई पुरुष अपनी ताकत और फिटनेस पर खास ध्यान देते हैं। जिम जाना, मसल्स बनाना और दिल की सेहत का ख्याल रखना उनकी प्राथमिकता होती है. लेकिन इसी दौड़ में सेहत का एक बेहद अहम हिस्सा किडनी की सेहत अक्सर नजरअंदाज हो जाता है. किडनी से जुड़ी समस्याओं का एक शुरुआती और बेहद खामोश संकेत है यूरिन में प्रोटीन का आना, जिसे मेडिकल भाषा में प्रोटीन्यूरिया कहा जाता है.

शुरुआती दौर में प्रोटीन्यूरिया के कोई साफ लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन यह अंदरूनी तौर पर किडनी को हो रहे नुकसान का इशारा हो सकता है. अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो आगे चलकर यह गंभीर बीमारियों का रूप ले सकता है. मेदांता, गुरुग्राम में नेफ्रोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट के सीनियर डायरेक्टर डॉ. मनीष जैन के मुताबिक, पुरुष अक्सर इस छिपे हुए संकेत को पहचान नहीं पाते. उन्होंने इसके बारे में बताया है. 

 

किडनी कैसे काम करती है?

किडनी हमारे शरीर का फिल्टर सिस्टम है. यह खून से गंदगी और अतिरिक्त तरल पदार्थ को छानकर पेशाब के जरिए बाहर निकालती है. इसके साथ ही ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने, शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने और रेड ब्लड सेल्स बनाने में भी इसकी अहम भूमिका होती है. स्वस्थ किडनी में मौजूद खास फिल्टर (ग्लोमेरुली) यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रोटीन जैसे बड़े तत्व यूरिन में न जाएं.

प्रोटीन्यूरिया क्या है और क्यों है खतरनाक?

जब किडनी के ये फिल्टर खराब होने लगते हैं, तो प्रोटीन पेशाब के रास्ते बाहर निकलने लगता है. अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. शुरुआत में कोई तकलीफ महसूस नहीं होती, इसलिए इसे किडनी की साइलेंट बीमारी भी कहा जाता है. लेकिन जैसे-जैसे नुकसान बढ़ता है, पैरों और टखनों में सूजन, थकान, झागदार पेशाब और रात में बार-बार पेशाब आने जैसी समस्याएं दिखने लगती हैं.

पुरुषों को ज्यादा दिक्कत क्यों?

पुरुषों में हाई ब्लड प्रेशर कम उम्र में होने की संभावना ज्यादा होती है, जो किडनी खराब होने की बड़ी वजह है. इसके अलावा टाइप-2 डायबिटीज का खतरा भी पुरुषों में अधिक देखा जाता है, जिससे समय के साथ किडनी को नुकसान पहुंचता है. बढ़ती उम्र में प्रोस्टेट बढ़ने की समस्या भी यूरिन के रास्ते में रुकावट पैदा कर सकती है, जिससे किडनी पर दबाव पड़ता है. साथ ही धूम्रपान, ज्यादा शराब पीना, प्रोसेस्ड फूड और रेड मीट का अधिक सेवन जैसी लाइफस्टाइल आदतें भी किडनी के लिए नुकसानदेह साबित होती हैं. लक्षणों को नजरअंदाज करना बीमारी की पहचान और इलाज में देरी कर देता है.

प्रोटीन्यूरिया की पहचान कैसे करें?

इसकी पहचान के लिए किसी जटिल जांच की जरूरत नहीं होती. एक सामान्य यूरिन टेस्ट से भी पेशाब में प्रोटीन का पता चल सकता है. अगर रिपोर्ट में प्रोटीन पाया जाता है, तो डॉक्टर आगे की जांच जैसे स्पॉट यूरिन प्रोटीन-क्रिएटिनिन रेशियो, 24 घंटे की यूरिन जांच और खून के टेस्ट से किडनी की स्थिति को परखते हैं,

किडनी को हेल्दी रखने के आसान उपाय

किडनी की सेहत के लिए सबसे जरूरी है ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना. अगर इनसे जुड़ी कोई समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह से दवा, सही खानपान और नियमित एक्सरसाइज अपनाएं। वजन को नियंत्रित रखें, क्योंकि मोटापा हाई बीपी और डायबिटीज दोनों का खतरा बढ़ाता है. रोजमर्रा के खाने में प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा लाल मांस और मीठे पेय पदार्थों को कम करें और फल, सब्जियां, साबुत अनाज और हल्के प्रोटीन को शामिल करें. इसके साथ हेल्थ चेकअप कराते रहें. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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क्या कच्चा अंडा खाने से सच में ज्यादा ताकत मिलती है? जान लें हकीकत, वरना हो जाएगा भारी नुकसान

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कई लोग अंडे को सिर्फ स्वाद के लिए खाते हैं, तो कुछ लोग इसे प्रोटीन का बड़ा सोर्स मानते हैं. इसी बीच सवाल उठता है कि अंडा खाने का सबसे सुरक्षित और सही तरीका क्या है. खासकर कच्चा अंडा खाने को लेकर लोगों में काफी कन्फ्यूजन है, क्योंकि कुछ लोग इसे ताकत बढ़ाने से जोड़ते हैं.

कच्चा अंडा खाने का सबसे बड़ा खतरा साल्मोनेला इंफेक्शन का होता है. कई स्टडीज में यह बात सामने आई है कि अंडे के छिलके या अंदर मौजूद बैक्टीरिया से फूड पॉइजनिंग हो सकती है. इससे बुखार, पेट दर्द, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वालों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकती हैं.

कच्चा अंडा खाने का सबसे बड़ा खतरा साल्मोनेला इंफेक्शन का होता है. कई स्टडीज में यह बात सामने आई है कि अंडे के छिलके या अंदर मौजूद बैक्टीरिया से फूड पॉइजनिंग हो सकती है. इससे बुखार, पेट दर्द, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वालों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकती हैं.

Published at : 22 Jan 2026 11:47 AM (IST)

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सावधान!  क्या आप भी रात भर जागती हैं? सिर्फ गांठ ही नहीं, ये भी हैं ब्रेस्ट कैंसर के बड़े कारण

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आईसीएमआर की एक स्टडी के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे लाइफस्टाइल में आए बदलाव अहम भूमिका निभा रहे हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि सिर्फ मैमोग्राफी पर निर्भर रहने के बजाय अब जोखिम के आधार पर जांच और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, खासकर युवा महिलाओं में.

नींद की कमी को लेकर अब ठोस सबूत सामने आ रहे हैं. नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इंफॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च के आंकड़े बताते हैं कि नींद का बिगड़ा पैटर्न शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित करता है. इससे मेलाटोनिन हार्मोन, एस्ट्रोजन संतुलन, इम्युनिटी और डीएनए रिपेयर पर असर पड़ता है, जो कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है.

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Published at : 22 Jan 2026 11:12 AM (IST)

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