रात में देर से खाना खाने की आदत सेहत को कैसे नुकसान पहुंचाती है? एक्सपर्ट से समझिए पूरी बात

रात में देर से खाना खाने की आदत सेहत को कैसे नुकसान पहुंचाती है? एक्सपर्ट से समझिए पूरी बात


Side Effects Of Eating Late At Night: आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी और देर तक काम करने की वजह से कई लोग रात में काफी देर से खाना खाते हैं. कुछ लोगों के लिए यह रोजमर्रा की आदत बन चुकी है, लेकिन क्या यह आदत सेहत के लिए सही है? डाइट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका जवाब हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं हो सकता. देर रात खाना खाने का असर आपकी सेहत, लाइफस्टाइल और पहले से मौजूद बीमारियों पर निर्भर करता है. 

देर रात खाना खाने का क्या होता है असर?

Univerity of Rochester Medical Center के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति को एसिड रिफ्लक्स  या डायबिटीज जैसी समस्या है, तो देर रात खाना खाने से परेशानी बढ़ सकती है. सोने से ठीक पहले खाना खाने पर पेट में बनने वाला एसिड ऊपर की ओर आ सकता है, जिससे सीने में जलन, खट्टी डकार और गले में जलन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.  इसलिए ऐसे लोगों को सोने से कम से कम दो से तीन घंटे पहले रात का खाना खा लेना चाहिए. 

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डायबिटीड के मरीजों के लिए क्या दिक्कत?

डायबिटीज के मरीजों के लिए भी देर रात खाना नुकसानदायक हो सकता है. तय समय से अलग भोजन करने पर ब्लड शुगर का स्तर ऊपर-नीचे हो सकता है. इससे नींद प्रभावित होती है और अगले दिन भूख भी असामान्य महसूस हो सकती है. ऐसे लोगों को डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार ही रात के भोजन का समय तय करना चाहिए. अगर आप पूरी तरह स्वस्थ हैं और किसी गंभीर बीमारी से नहीं जूझ रहे हैं, तो कभी-कभार देर से खाना खाना बड़ी समस्या नहीं माना जाता. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ आदत या बोरियत की वजह से खाने से बचना चाहिए. पहले यह समझें कि आपको वास्तव में भूख लगी है या आप सिर्फ समय बिताने के लिए कुछ खा रहे हैं. 

रात में क्या खाने से बचना चाहिए?

रात में क्या खा रहे हैं, यह भी उतना ही जरूरी है जितना कि कब खा रहे हैं. अगर आपको एसिड रिफ्लक्स की समस्या है, तो सोने से पहले ज्यादा तला-भुना या मांस, चीज, अंडे और अधिक डेयरी प्रोडक्ट्स खाने से बचें. इसकी बजाय मेवे, नट बटर या हल्के पौधों से बने स्नैक्स बेहतर विकल्प हो सकते हैं. वहीं डायबिटीज के मरीजों को ऐसा स्नैक चुनना चाहिए जिसमें प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट का संतुलन हो, ताकि ब्लड शुगर नियंत्रित रहे. दांतों की सेहत के लिए भी देर रात मीठी या ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें खाना ठीक नहीं माना जाता. ऐसे खाद्य पदार्थ मुंह में लंबे समय तक शुगर छोड़ते हैं, जिससे कैविटी का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए रात में कुछ भी खाने के बाद ब्रश करना और दांतों की सफाई करना जरूरी है. 

रात में भूख लगने पर क्या करें?

अगर आपको रोज रात में भूख लगती है, तो इसकी वजह दिनभर पर्याप्त भोजन न करना, तनाव, बोरियत, इमोशनल कारण, ज्यादा एक्सरसाइज या फिर शरीर में प्रोटीन और फाइबर की कमी भी हो सकती है. ऐसे में सबसे पहले यह समझने की कोशिश करें कि भूख असली है या सिर्फ आदत. अगर सच में भूख लगी है तो हल्का और संतुलित स्नैक लें, लेकिन अगर यह सिर्फ आदत है तो उसे धीरे-धीरे बदलने की कोशिश करें.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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बारिश के मौसम में सबसे ज्यादा फैलने वाली 7 बीमारियां कौन-सी, इनसे बचने के आसान उपाय क्या?

बारिश के मौसम में सबसे ज्यादा फैलने वाली 7 बीमारियां कौन-सी, इनसे बचने के आसान उपाय क्या?


Common Monsoon Diseases And Prevention: मानसून की बारिश जहां गर्मी से राहत दिलाती है, वहीं अपने साथ कई तरह की बीमारियों का खतरा भी लेकर आती है. हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाइट Healthline के अनुसार, बारिश के दौरान जगह-जगह पानी जमा हो जाता है, जिससे मच्छरों का प्रजनन तेजी से बढ़ता है. वहीं दूषित पानी और गंदगी के कारण बैक्टीरिया और वायरस भी तेजी से फैलते हैं. ऐसे में थोड़ी-सी लापरवाही आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है. चलिए आपको बताते हैं बारिश के मौसम में सबसे ज्यादा होने वाली 7 बीमारियों और उनसे बचने के आसान उपायों के बारे में. 

डेंगू

बारिश के मौसम में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ते हैं. यह एडीज मच्छर के काटने से फैलता है. तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में तेज दर्द इसके प्रमुख लक्षण हैं. इससे बचने के लिए घर के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें.

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मलेरिया

मलेरिया इंफेक्टेड मच्छर के काटने से होता है. इसमें ठंड लगकर बुखार आना, पसीना आना, कमजोरी और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. मच्छरों से बचाव के लिए रिपेलेंट का इस्तेमाल करें और शाम के समय विशेष सावधानी बरतें.

चिकनगुनिया

यह भी मच्छरों के जरिए फैलने वाली बीमारी है. इसमें अचानक तेज बुखार के साथ जोड़ों में इतना दर्द हो सकता है कि चलना-फिरना मुश्किल हो जाए. घर और आसपास साफ-सफाई रखने तथा मच्छरों की रोकथाम करने से इसका खतरा काफी कम किया जा सकता है.

टाइफाइड

दूषित भोजन और पानी के कारण टाइफाइड होने का खतरा मानसून में बढ़ जाता है. लगातार बुखार, पेट दर्द, कमजोरी और पाचन संबंधी समस्याएं इसके सामान्य लक्षण हैं. हमेशा उबला या साफ पानी पिएं और खुले में बिकने वाले खाने से परहेज करें.

हेपेटाइटिस ए

यह इंपेक्शन भी गंदे पानी और दूषित भोजन के जरिए फैलता है. इसमें आंखों और त्वचा का पीला पड़ना, भूख कम लगना, थकान और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं. भोजन और पानी की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना इसका सबसे अच्छा बचाव है.

गैस्ट्रोएंटेराइटिस

बारिश के मौसम में पेट से जुड़ी समस्याएं भी काफी बढ़ जाती हैं. दूषित खाना या पानी खाने से दस्त, उल्टी, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन की शिकायत हो सकती है. हमेशा ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन खाएं और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें.

सर्दी-जुकाम और फ्लू

मौसम में अचानक बदलाव और बढ़ी हुई नमी के कारण वायरल इंफेक्शन तेजी से फैलते हैं. नाक बहना, गले में खराश, खांसी और हल्का बुखार इसके आम लक्षण हैं. हाथों की नियमित सफाई करें, पर्याप्त नींद लें और पौष्टिक भोजन खाकर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखें.

बारिश के मौसम में छोटी-सी सावधानी कई गंभीर बीमारियों से बचा सकती है. साफ पानी पीना, घर के आसपास पानी जमा न होने देना, संतुलित आहार लेना और जरूरत पड़ने पर समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना आपकी और पूरे परिवार की सेहत को सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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बिना मिर्गी के पड़ने वाले दौरों पर योग निद्रा कितनी असरदार? एम्स की नई रिसर्च ने चौंकाया

बिना मिर्गी के पड़ने वाले दौरों पर योग निद्रा कितनी असरदार? एम्स की नई रिसर्च ने चौंकाया


योग निद्रा को तनाव कम करने, अच्छी नींद लाने और मन को शांत रखने के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन क्या इससे उन लोगों को भी फायदा मिलता है, जिन्हें मिर्गी जैसे दौरे पड़ते हैं, जबकि उन्हें असल में मिर्गी नहीं होती?

इसी सवाल का जवाब जानने के लिए एम्स (AIIMS) दिल्ली के न्यूरोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. मंजरी त्रिपाठी और उनकी टीम ने एक रिसर्च की. इस स्टडी की मुख्य लेखक डॉ. सारन्या बी. गोमाथी हैं. 50 मरीजों पर हुई इस स्टडी में पाया गया कि मरीजों की हालत में सुधार जरूर हुआ, लेकिन इलाज के साथ योग निद्रा कराने से कोई अलग फायदा नहीं मिला. यह रिसर्च अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल एपिलेप्सी एंड बिहेवियर(Epilepsy & Behavior) में प्रकाशित हुई है.

योग निद्रा क्या है?

योग निद्रा योग की एक ऐसी तकनीक है, जिसमें व्यक्ति आराम से लेटकर आंखें बंद करता है और प्रशिक्षक या ऑडियो के बताए निर्देशों का पालन करता है. इसमें सांस पर ध्यान दिया जाता है, शरीर को पूरी तरह आराम दिया जाता है और मन को शांत करने की कोशिश की जाती है. इसे तनाव, चिंता और नींद की समस्या कम करने में मददगार माना जाता है.

किस बीमारी पर हुई रिसर्च?

यह रिसर्च फंक्शनल डिसोसिएटिव सीजर्स (FDS) नाम की बीमारी पर की गई. इस बीमारी में मरीज को मिर्गी जैसे दौरे पड़ते हैं, लेकिन जांच में पता चलता है कि उसे मिर्गी नहीं है. यानी दौरे तो मिर्गी जैसे दिखते हैं, लेकिन उनकी वजह कुछ और होती है. इसी कारण कई बार मरीजों का लंबे समय तक मिर्गी समझकर इलाज चलता रहता है. इस बीमारी की सही पहचान वीडियो-ईईजी नाम की एक खास जांच से होती है.

कैसे हुई स्टडी?

जनवरी 2021 से फरवरी 2022 के बीच डॉक्टरों ने 72 मरीजों की जांच की. इनमें से 50 मरीजों को रिसर्च में शामिल किया गया. सबसे पहले सभी मरीजों को उनकी बीमारी के बारे में आसान भाषा में समझाया गया और काउंसलिंग दी गई. इसके बाद 25 मरीजों को योग निद्रा कराई गई, जबकि बाकी 25 मरीजों को उसी समय का एक सामान्य ऑडियो सुनाया गया, जिसमें योग निद्रा की मुख्य तकनीकें शामिल नहीं थीं. इसके बाद सभी मरीजों की छह महीने तक निगरानी की गई.

रिसर्च में क्या पता चला?

छह महीने बाद दोनों समूहों के मरीजों में अच्छा सुधार देखने को मिला. मरीजों को पहले के मुकाबले कम दौरे पड़े. उनकी चिंता और अवसाद भी कम हुआ और रोजमर्रा की जिंदगी पहले से बेहतर हुईए लेकिन जिन मरीजों ने योग निद्रा की, उन्हें दूसरे समूह की तुलना में कोई अलग फायदा नहीं मिला. यानी इलाज के साथ योग निद्रा जोड़ने से इस स्टडी में बेहतर नतीजे नहीं मिले.

किन लोगों पर हुई स्टडी?

स्टडी में शामिल ज्यादातर मरीज युवा महिलाएं थीं. करीब 66 फीसदी मरीजों का पहले मिर्गी समझकर इलाज किया जा चुका था. वहीं, ज्यादातर मरीजों ने पढ़ाई का दबाव, घरेलू तनाव या पारिवारिक समस्याओं जैसी बातों का जिक्र किया. आधे से ज्यादा मरीज चिंता और अवसाद जैसी मानसिक समस्याओं से भी जूझ रहे थे.

डॉक्टरों ने क्या कहा?

रिसर्च करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि इस स्टडी में योग निद्रा से कोई नुकसान या दुष्प्रभाव नहीं देखा गया. हालांकि, यह साबित नहीं हो सका कि इस बीमारी के इलाज में योग निद्रा जोड़ने से मरीजों को अलग से ज्यादा फायदा मिलता है. इसलिए इस विषय पर बड़े स्तर पर और लंबे समय तक रिसर्च किए जाने की जरूरत है.

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पेट की खराबी कैसे देती है डिप्रेशन और एंग्जायटी को जन्म? जानें आंतों को साफ रखने का नुस्खा

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Reasons Behind Depression: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में गलत खान-पान और तनाव के चलते ज्यादातर लोगों को पेट से जुड़ी परेशानियां होने लगी हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि पेट का सीधा असर हमारे दिमाग और मूड पर भी पड़ता है. डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे पेट और दिमाग के बीच एक गहरा नाता होता है. इसका मतलब है कि पेट और दिमाग आपस में एक नस के जरिए जुड़े रहते हैं और लगातार एक-दूसरे को संकेत भेजते रहते हैं. अगर पेट में गड़बड़ी हो, तो इसका सीधा असर दिमाग की सेहत पर भी पड़ता है, जिससे डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.

गट माइक्रोबायोटा और सेरोटोनिन का मानसिक स्वास्थ्य से रिश्ता

असल में हमारी आंतों में काफी अच्छे बैक्टीरिया रहते हैं, जिन्हें गट माइक्रोबायोटा कहा जाता है.  यही बैक्टीरिया शरीर में सेरोटोनिन नाम का हार्मोन बनाने में मदद करते हैं, जिसे खुशी का हार्मोन भी कहा जाता है. जब पेट में गंदगी जमा हो जाती है या पाचन ठीक से नहीं होता, तो इन अच्छे बैक्टीरिया की संख्या कम होने लगती है. इससे शरीर में सूजन बढ़ जाती है और यह सूजन खून के रास्ते दिमाग तक पहुंच जाती है. इससे दिमाग के काम करने के तरीके पर असर पड़ता है और इंसान को बिना किसी वजह उदासी, घबराहट और बेचैनी महसूस होने लगती है. यही वजह है कि जिन लोगों को लंबे समय तक कब्ज, गैस या पेट फूलने जैसी परेशानी रहती है, उनमें डिप्रेशन और एंग्जायटी के लक्षण दिखने की संभावना ज्यादा होती है. 

अगर आपको भी बार-बार पेट में भारीपन, गैस, कब्ज, नींद न आना, बिना वजह चिड़चिड़ापन या मन उदास रहना जैसी दिक्कतें महसूस होती हैं, तो यह पेट की खराबी और दिमाग पर उसके असर का संकेत हो सकता है. ऐसे में समय रहते अपने खान-पान और दिनचर्या पर ध्यान देना बहुत जरूरी हो जाता है.

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आंतों को स्वस्थ रखने के आसान और असरदार उपाय

ऐसे में आंतों को साफ और सेहतमंद रखने के लिए कुछ आसान आदतें अपनाई जाती हैं. सबसे पहले रोजाना खूब पानी पीना चाहिए, ताकि पाचन तंत्र ठीक से काम करे. खाने में हरी सब्जियां, फल, दही और साबुत अनाज जैसी फाइबर वाली चीजें शामिल करनी चाहिए, क्योंकि यह आंतों में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाने में मदद करती हैं. साथ ही तला-भुना और बाहर का जंक फूड जितना हो सके कम खाना चाहिए. वहीं रोजाना कम से कम आधे घंटे की सैर या हल्की एक्सरसाइज करने से भी पाचन बेहतर होता है और मन भी शांत रहता है.  इसके अलावा भरपूर नींद लेना और तनाव को कम करने के लिए योग या मेडिटेशन को दिनचर्या में शामिल करना भी बहुत फायदेमंद माना जाता है.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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अंजीर खाने के पांच अनोखे तरीके, बचपन से लेकर प्रेग्नेंसी और बुढ़ापे तक होगा चमत्कार

अंजीर खाने के पांच अनोखे तरीके, बचपन से लेकर प्रेग्नेंसी और बुढ़ापे तक होगा चमत्कार


पहला तरीका है भीगा हुआ अंजीर खाना. रात को दो अंजीर पानी में भिगोकर रख दें और सुबह खाली पेट पानी के साथ खाएं. भिगोने से इसमें मौजूद फाइबर हल्का हो जाता है, जिससे यह आसानी से पच जाता है और पेट साफ रहने में मदद मिलती है. दूसरा तरीका है गर्म दूध के साथ अंजीर खाना. रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में दो अंजीर मिलाकर खाने से शरीर को कैल्शियम बेहतर तरीके से मिलता है, जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं और नींद भी अच्छी आती है.

तीसरा तरीका है सूखे अंजीर को सीधे ड्राई फ्रूट की तरह खाना, जो हल्की भूख लगने पर एक सेहतमंद स्नैक का काम करता है. चौथा तरीका है अंजीर को शेक या स्मूदी में मिलाकर पीना, जिससे बच्चों और बड़ों दोनों को यह स्वाद के साथ आसानी से खिलाया जा सकता है.  पांचवां तरीका है अंजीर को सलाद, दलिया या हलवे में शामिल करना, जिससे रोजमर्रा के खाने में भी इसका पोषण जुड़ जाता है.

तीसरा तरीका है सूखे अंजीर को सीधे ड्राई फ्रूट की तरह खाना, जो हल्की भूख लगने पर एक सेहतमंद स्नैक का काम करता है. चौथा तरीका है अंजीर को शेक या स्मूदी में मिलाकर पीना, जिससे बच्चों और बड़ों दोनों को यह स्वाद के साथ आसानी से खिलाया जा सकता है. पांचवां तरीका है अंजीर को सलाद, दलिया या हलवे में शामिल करना, जिससे रोजमर्रा के खाने में भी इसका पोषण जुड़ जाता है.

बच्चों के लिए अंजीर बहुत फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इसमें मौजूद कैल्शियम और आयरन उनकी हड्डियों और शरीर के विकास में मदद करते हैं. जिन बच्चों को कब्ज की शिकायत रहती है, उनके लिए भीगा हुआ अंजीर पेट साफ रखने में सहायक हो सकता है. हालांकि छोटे बच्चों को अंजीर हमेशा सीमित मात्रा में ही देना चाहिए, क्योंकि उनका पाचन तंत्र अभी पूरी तरह मजबूत नहीं होता.

बच्चों के लिए अंजीर बहुत फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इसमें मौजूद कैल्शियम और आयरन उनकी हड्डियों और शरीर के विकास में मदद करते हैं. जिन बच्चों को कब्ज की शिकायत रहती है, उनके लिए भीगा हुआ अंजीर पेट साफ रखने में सहायक हो सकता है. हालांकि छोटे बच्चों को अंजीर हमेशा सीमित मात्रा में ही देना चाहिए, क्योंकि उनका पाचन तंत्र अभी पूरी तरह मजबूत नहीं होता.

प्रेग्नेंसी के दौरान भी अंजीर को एक अच्छा आहार माना जाता है. इस समय महिलाओं के शरीर को ज्यादा पोषण की जरूरत होती है और अंजीर में मौजूद कैल्शियम, आयरन और विटामिन इस जरूरत को पूरा करने में मदद करते हैं. कई महिलाओं को प्रेग्नेंसी में कब्ज और कमजोरी जैसी शिकायत होती है, ऐसे में अंजीर का सेवन राहत दे सकता है.  हालांकि इसे ज्यादा मात्रा में खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे शुगर लेवल बढ़ने या पेट खराब होने जैसी दिक्कत हो सकती है.  इसलिए प्रेग्नेंसी में अंजीर खाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए.

प्रेग्नेंसी के दौरान भी अंजीर को एक अच्छा आहार माना जाता है. इस समय महिलाओं के शरीर को ज्यादा पोषण की जरूरत होती है और अंजीर में मौजूद कैल्शियम, आयरन और विटामिन इस जरूरत को पूरा करने में मदद करते हैं. कई महिलाओं को प्रेग्नेंसी में कब्ज और कमजोरी जैसी शिकायत होती है, ऐसे में अंजीर का सेवन राहत दे सकता है. हालांकि इसे ज्यादा मात्रा में खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे शुगर लेवल बढ़ने या पेट खराब होने जैसी दिक्कत हो सकती है. इसलिए प्रेग्नेंसी में अंजीर खाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए.

बुढ़ापे में शरीर की हड्डियां और पाचन तंत्र दोनों धीरे-धीरे कमजोर होने लगते हैं.  ऐसे में अंजीर में मौजूद कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है, जबकि इसका फाइबर पाचन को दुरुस्त रखता है. बुजुर्गों के लिए गर्म दूध के साथ अंजीर खाना खासतौर पर फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इससे शरीर को आराम भी मिलता है और पोषण भी. हालांकि बुजुर्गों को भी अंजीर सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए और अगर वे कोई नियमित दवा लेते हैं, तो पहले डॉक्टर से पूछ लेना बेहतर रहता है.

बुढ़ापे में शरीर की हड्डियां और पाचन तंत्र दोनों धीरे-धीरे कमजोर होने लगते हैं. ऐसे में अंजीर में मौजूद कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है, जबकि इसका फाइबर पाचन को दुरुस्त रखता है. बुजुर्गों के लिए गर्म दूध के साथ अंजीर खाना खासतौर पर फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इससे शरीर को आराम भी मिलता है और पोषण भी. हालांकि बुजुर्गों को भी अंजीर सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए और अगर वे कोई नियमित दवा लेते हैं, तो पहले डॉक्टर से पूछ लेना बेहतर रहता है.

कुल मिलाकर अंजीर एक ऐसा फल है, जो बचपन से लेकर बुढ़ापे तक हर उम्र में शरीर को फायदा पहुंचा सकता है.  लेकिन हर चीज की तरह इसे भी सही मात्रा में और सही तरीके से खाना जरूरी है. रोजाना दो से तीन अंजीर खाना ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित माना जाता है, लेकिन जिन लोगों को शुगर, ब्लड प्रेशर या कोई पुरानी बीमारी है, उन्हें अंजीर शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए. अगर सही तरीके से इसे अपनी डाइट में शामिल किया जाए, तो यह छोटा सा फल सेहत के लिए वाकई एक चमत्कार साबित हो सकता है.

कुल मिलाकर अंजीर एक ऐसा फल है, जो बचपन से लेकर बुढ़ापे तक हर उम्र में शरीर को फायदा पहुंचा सकता है. लेकिन हर चीज की तरह इसे भी सही मात्रा में और सही तरीके से खाना जरूरी है. रोजाना दो से तीन अंजीर खाना ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित माना जाता है, लेकिन जिन लोगों को शुगर, ब्लड प्रेशर या कोई पुरानी बीमारी है, उन्हें अंजीर शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए. अगर सही तरीके से इसे अपनी डाइट में शामिल किया जाए, तो यह छोटा सा फल सेहत के लिए वाकई एक चमत्कार साबित हो सकता है.

Published at : 06 Jul 2026 12:05 AM (IST)

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सुबह उठते ही देखते हैं फोन? ये आदत बना देगी इस गंभीर बीमारी का मरीज, आज ही संभलें

सुबह उठते ही देखते हैं फोन? ये आदत बना देगी इस गंभीर बीमारी का मरीज, आज ही संभलें


Checking Phone After Waking Up: सुबह-सुबह उठते ही कई लोगों की आदत होती है कि वे गर्म पानी पीते हैं, एक्सरसाइज करने जाते हैं, ये सारी बातें तो अच्छी आदतों में गिनी जाती हैं, पर एक ओर आदत होती है जिसे अक्सर हर कोई नजरअंदाज कर देता है, वह है सुबह की शुरुआत फोन देखकर करना. आज के समय में नींद खुलते ही सबसे पहला काम मैसेज, सोशल मीडिया और खबरें चेक करना बन गया है.

कई रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि करीब 70 से 80 प्रतिशत लोग जागने के 10 से 15 मिनट के अंदर ही अपना फोन उठा लेते हैं. यह आदत देखने में बहुत छोटी लगती है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यह आदत धीरे-धीरे शरीर और दिमाग दोनों पर नुकसान पहुंचाती है. वे यह भी बताते हैं कि समय रहते इस आदत को नहीं सुधारा गया, तो यह आगे चलकर एक बड़ी परेशानी का रूप ले सकती है.

सुबह-सुबह मोबाइल चलाने से दिमाग पर क्या पड़ता है असर

यह बात जानकर कई लोगों के दिमाग में आता है कि आखिर सुबह-सुबह फोन चलाने से क्या होता है. ऐसे में बता दें कि असल में जब हम सोकर उठते हैं, तो हमारा दिमाग एक हल्की सी नींद और जागने के बीच की अवस्था में होता है, जिसे विशेषज्ञ “स्लीप इनर्शिया” कहते हैं. इस समय दिमाग को धीरे-धीरे जागने और शांत तरीके से एक्टिव होने की जरूरत होती है. लेकिन जैसे ही हम फोन उठाकर मैसेज, ईमेल या सोशल मीडिया देखना शुरू करते हैं, तब दिमाग पर अचानक से बहुत सारी जानकारी का बोझ पड़ जाता है.

हालांकि ये प्रतिक्रियाएं जरूरत पड़ने पर की जाएं तो उसका असर उतना नहीं होता है, जैसे सोते वक्त किसी की कॉल आ जाए या फिर कोई जरूरी मैसेज आ जाए, लेकिन वहीं अगर यह प्रक्रिया रोज दोहराई जाए, तो धीरे-धीरे शरीर हमेशा हल्के तनाव की स्थिति में रहने लगता है.

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फोन की स्क्रीन कैसे बिगाड़ती है नींद और मानसिक सेहत

सिर्फ मानसिक सेहत ही नहीं, बल्कि यह आदत नींद के पूरे पैटर्न को भी बिगाड़ देती है. सुबह फोन की स्क्रीन से निकलने वाली तेज रोशनी शरीर की प्राकृतिक घड़ी यानी बॉडी क्लॉक को गड़बड़ कर देती है, जिससे रात में नींद ठीक से नहीं आती. नींद पूरी न होने का असर पूरे दिन की एनर्जी, याददाश्त और काम करने की क्षमता पर पड़ता है. इसके अलावा जो लोग सुबह उठते ही नकारात्मक खबरें या तनाव भरी जानकारी देखने लगते हैं, उनका पूरा दिन ही चिड़चिड़ापन और बेचैनी में गुजरता है.

सुबह मोबाइल की आदत छोड़ने के आसान और असरदार तरीके

इस परेशानी के साथ-साथ विशेषज्ञ इससे बचने के तरीके भी बताते हुए कहते हैं कि, जिन लोगों को सुबह उठते ही फोन चलाने की आदत होती है उन्हें सबसे पहले फोन को बेडरूम से बाहर या बिस्तर से दूर चार्जिंग पर रखना चाहिए, ताकि उठते ही हाथ फोन की तरफ न बढ़े. इसके अलावा अलार्म के लिए फोन की जगह अलार्म घड़ी का इस्तेमाल करना चाहिए. 

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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