हर दिन 42 मौतें, डिप्रेशन और तनाव बना बड़ी चुनौती, एक्सपर्ट ने बताए ये शुरुआती लक्षण

हर दिन 42 मौतें, डिप्रेशन और तनाव बना बड़ी चुनौती, एक्सपर्ट ने बताए ये शुरुआती लक्षण


Warning Signs Of Mental Health Problems: मेंटल हेल्थ आज भारत के सामने उभरती हुई सबसे बड़ी हेल्थ चुनौतियों में से एक बनता जा रहा है. इसका गंभीर संकेत  2024 के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो  के आंकड़ों में भी देखने को मिला है. रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में वर्ष 2024 के दौरान 15,491 लोगों ने आत्महत्या की, यानी औसतन हर दिन 42 लोगों ने अपनी जान गंवाई. यह आंकड़ा सिर्फ एक अपराध या सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि गहराते मेंटल हेल्थ संकट की ओर भी इशारा करता है.

मेंटल हेल्थ क्यों चुनौती की तरह उभर रहा?

एक्सपर्ट का मानना है कि छात्रों और युवाओं में बढ़ता तनाव इस संकट का एक बड़ा कारण बनकर उभरा है. प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव, करियर को लेकर अनिश्चितता और लगातार बढ़ती अपेक्षाएं युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं. आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश छात्र आत्महत्या के मामलों में देश में तीसरे स्थान पर है और राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली छात्र आत्महत्याओं में लगभग 10 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले इसी राज्य की है.


लड़कियों के मामले हैरान कर देने वाले

चिंताजनक बात यह है कि छात्राओं पर मानसिक दबाव का असर अधिक दिखाई दे रहा है. वर्ष 2024 में राज्य में 731 छात्राओं और 716 छात्रों ने आत्महत्या की. इसे बढ़ते शैक्षणिक दबाव, सामाजिक अपेक्षाओं और भावनात्मक तनाव से जोड़कर देखते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि आत्महत्या कभी भी अचानक लिया गया फैसला नहीं होता. इसके पीछे लंबे समय से चल रही मानसिक परेशानियां, डिप्रेशन, चिंता और इमोशनल संघर्ष छिपे हो सकते हैं. इसलिए शुरुआती संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है.

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क्या होते हैं इसके लक्षण?

अहमदाबाद स्थित एक निजी मनोचिकित्सा केंद्र की कंसलटेंट और ‘हैप्पीनेस फर्स्ट’ की एक्सपर्ट डॉ. विधि पटेल वैष्णव के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बार-बार मौत या आत्महत्या की बातें करने लगे, अत्यधिक चिंता और बेचैनी महसूस करे, खुद को निरर्थक समझने लगे, अचानक लोगों से दूरी बनाने लगे या अपनी प्रिय चीजें दूसरों को देने लगे, तो इसे गंभीर चेतावनी संकेत माना जाना चाहिए. ऐसे मामलों में तुरंत एक्सपर्ट की मदद लेना जरूरी है. डॉ का कहना है कि समय पर मेडिकल सहायता और इमोशनल सहयोग कई जिंदगियां बचा सकता है. अच्छी नींद, नियमित व्यायाम, परिवार और दोस्तों से खुलकर बात करना, स्क्रीन टाइम कम करना और जीवन में संतोष की भावना विकसित करना मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मददगार हो सकता है.

मेंटल हेल्थ पर ध्यान देने की जरूरत

एक्सपर्ट यह भी मानते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को गांव और छोटे शहरों तक पहुंचाना समय की जरूरत है. स्कूलों और कॉलेजों में काउंसलिंग सुविधाएं, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य एक्सपर्ट और जागरूकता अभियान इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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डायबिटीज के मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज उनका खानपान है. अक्सर लोग दवा तो समय पर लेते हैं, लेकिन खाने-पीने में लापरवाही कर बैठते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार मैदा, ज्यादा चीनी, कोल्ड ड्रिंक, जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकता है. इसके बजाय साबुत अनाज, ओट्स, ब्राउन राइस, दालें, हरी सब्जियां और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करना चाहिए.

अगर आप चाहते हैं कि आपकी शुगर कंट्रोल में रहे तो शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा. विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना कम से कम 30 मिनट की वॉक, योग या हल्का व्यायाम शरीर में इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है. साथ ही लगातार बैठे रहने की आदत न केवल वजन बढ़ाती है बल्कि ब्लड शुगर को भी असंतुलित कर सकती है. इसलिए चाहे आप घर पर हों या ऑफिस में, दिनभर सक्रिय रहने की कोशिश करें.

अगर आप चाहते हैं कि आपकी शुगर कंट्रोल में रहे तो शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा. विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना कम से कम 30 मिनट की वॉक, योग या हल्का व्यायाम शरीर में इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है. साथ ही लगातार बैठे रहने की आदत न केवल वजन बढ़ाती है बल्कि ब्लड शुगर को भी असंतुलित कर सकती है. इसलिए चाहे आप घर पर हों या ऑफिस में, दिनभर सक्रिय रहने की कोशिश करें.

Published at : 10 Jun 2026 07:48 AM (IST)

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क्या सच में आलू खाने से एसिडिटी की दिक्कत होती है? जानें इसको खाने के सही तरीके

क्या सच में आलू खाने से एसिडिटी की दिक्कत होती है? जानें इसको खाने के सही तरीके


Does Eating Potatoes Really Cause Acidity: आलू भारतीय रसोई का ऐसा हिस्सा है जो लगभग हर घर में किसी न किसी रूप में खाया जाता है. लेकिन कई लोग आलू खाने के बाद पेट में जलन, गैस, भारीपन या एसिडिटी की शिकायत करते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में आलू एसिडिटी बढ़ाता है या इसके पीछे कोई और वजह होती है? एक्सपर्ट के अनुसार ज्यादातर मामलों में समस्या आलू से नहीं, बल्कि उसे खाने के तरीके और व्यक्ति की पाचन क्षमता से जुड़ी होती है. 

क्या सच में इससे गैस बनती है?

Ubiehealth की रिपोर्ट के अनुसार, आलू में रेजिस्टेंट स्टार्च पाया जाता है. यह एक प्रकार का स्टार्च है जो पूरी तरह पच नहीं पाता और बड़ी आंत तक पहुंच जाता है. वहां मौजूद बैक्टीरिया इसे फर्मेंट करते हैं, जिससे गैस बनने लगती है, कुछ लोगों में यही गैस पेट फूलने, भारीपन और एसिडिटी जैसे लक्षण पैदा कर सकती है खासकर जिन लोगों का डाइजेशन सिस्टम सेंसिटिवहोता है, उन्हें यह समस्या ज्यादा महसूस हो सकती है.

किन लोगों को हो सकती है दिक्कत?

यदि आप इरिटेबल बाउल सिंड्रोम या बार-बार होने वाली डाइजेशन संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं, तो ज्यादा मात्रा में आलू खाने से भी असहजता बढ़ सकती है. हालांकि आलू को सामान्य तौर पर पाचन के लिए सुरक्षित माना जाता है, लेकिन बड़ी मात्रा में इसका सेवन कुछ लोगों में गैस और पेट दर्द का कारण बन सकता है. 

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कैसे सही तरीके से कर सकते हैं यूज?

आलू खाने का तरीका भी काफी मायने रखता है. उबले या बेक किए गए आलू आमतौर पर आसानी से पच जाते हैं, जबकि फ्रेंच फ्राइज, चिप्स या ज्यादा तेल-मसाले में बने आलू पेट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं. तैलीय भोजन पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देता है, जिससे एसिडिटी और गैस की समस्या बढ़ सकती है. इसलिए यदि आलू खाने के बाद जलन महसूस होती है, तो सबसे पहले उसकी तैयारी के तरीके पर ध्यान देना चाहिए. एक्सपर्ट यह भी सलाह देते हैं कि हरे रंग के या अंकुरित आलू खाने से बचना चाहिए. ऐसे आलू में सोलनाइन नामक नेचुरल टॉक्सिक तत्व की मात्रा बढ़ सकती है, जो पेट दर्द, मतली और पाचन संबंधी परेशानियों का कारण बन सकता है.

अगर आपको लगता है कि आलू खाने के बाद बार-बार एसिडिटी हो रही है, तो कुछ दिनों तक अपने खानपान का रिकॉर्ड रखें. ध्यान दें कि आपने आलू किस रूप में खाया, कितनी मात्रा में खाया और उसके बाद कौन से लक्षण दिखाई दिए.  इससे सही कारण समझने में मदद मिल सकती है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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ये चीजें आज ही कर दें अपनी लाइफ से दूर, ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ाते हैं जुबान को पसंद ये पदार्थ

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सबसे पहले बात करते हैं शुगर से भरपूर ड्रिंक्स की. कसार कई लोगों ये न्ही पता होता है की कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस और एनर्जी ड्रिंक्स जैसी चीजों में काफी मात्रा में चीनी होती है. ऐसे में विशेष्यज्ञ सलाह देतें हैं कि इनका ज्यादा सेवन शरीर में सूजन बढ़ाने का काम कर सकता है. इसके अलावा ये वजन बढ़ाने और कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकते हैं. इसलिए जितना हो सके इनकी जगह सादा पानी, नारियल पानी या ताजे फलों का सेवन करना बेहतर माना जाता है.

प्रोसेस्ड मीट भी ऐसी चीजों में शामिल है जिससे दूरी बनाना बेहतर माना जाता है. सॉसेज, सलामी, हॉट डॉग और कई तरह के पैक्ड मीट उत्पाद लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग रसायनों से तैयार किए जाते हैं. ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इसलिए ताजा और घर में बना खाना हमेशा बेहतर विकल्प माना जाता है.

प्रोसेस्ड मीट भी ऐसी चीजों में शामिल है जिससे दूरी बनाना बेहतर माना जाता है. सॉसेज, सलामी, हॉट डॉग और कई तरह के पैक्ड मीट उत्पाद लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग रसायनों से तैयार किए जाते हैं. ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इसलिए ताजा और घर में बना खाना हमेशा बेहतर विकल्प माना जाता है.

Published at : 10 Jun 2026 03:15 AM (IST)

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ब्लॉटिंग से लेकर अनियमित पीरियड्स तक, ओवेरियन कैंसर के ये 6 लक्षण भूलकर भी न करें इग्नोर

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Early Warning Signs Of Ovarian Cancer In Women: भारत में महिलाओं के बीच ओवेरियन कैंसर तीसरा सबसे आम कैंसर माना जाता है. चिंता की बात यह है कि ज्यादातर महिलाओं को इसकी पहचान तब होती है जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है. एक्सपर्ट के अनुसार भारत में करीब 70 से 80 प्रतिशत ओवेरियन कैंसर के मामले एडवांस स्टेज में सामने आते हैं. इसकी बड़ी वजह यह नहीं है कि बीमारी को पहले पकड़ा नहीं जा सकता, बल्कि इसके शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि उन्हें अक्सर किसी दूसरी समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है.

क्या इसके लक्षण पहले से पता नहीं चलते?

ऑन्कोलॉजिस्ट लंबे समय से ओवेरियन कैंसर को साइलेंट डिजीज कहते रहे हैं, लेकिन डॉ. संपदा देसाई ने TOI को बताया कि यह बीमारी पूरी तरह खामोश नहीं होती. उनके अनुसार ओवेरियन कैंसर साइलेंट कैंसर जरूर कहलाता है, लेकिन यह कम संकेत देता है. इसके लक्षण अक्सर बहुत सामान्य होते हैं और ज्यादातर डाइजेशन से जुड़ी समस्याओं जैसे लगते हैं. संपदा देसाई बताती हैं कि जल्दी पेट भर जाना, लगातार पेट फूलना, ऊपरी पेट में असहजता महसूस होना और डाइजेशन संबंधी दिक्कतें इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं. समस्या यह है कि महिलाएं इन लक्षणों को गैस, हार्मोनल बदलाव या अन्य सामान्य परेशानियों से जोड़कर टाल देती हैं. 

किन दिक्कतों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज?

डॉ. शोना नाग के मुताबिक लगातार पेट फूलना सबसे आम संकेतों में से एक है. कई मरीज बताते हैं कि कम खाना खाने के बाद भी उन्हें अत्यधिक भरा हुआ महसूस होता है. यदि इसके साथ पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया में दर्द भी बना रहे या बार-बार लौटकर आए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसके अलावा पीरियड्स में असामान्य बदलाव, बहुत ज्यादा या बहुत कम ब्लीडिंग, अनियमित पीरियड्स या मेनोपॉज के बाद किसी भी तरह की ब्लीडिंग गंभीर संकेत हो सकते हैं.  डॉ. शोना के अनुसार, हार्मोनल बदलाव आम बात है, लेकिन लगातार बनी रहने वाली अनियमितताएं चिकित्सकीय जांच की मांग करती हैं. इसी तरह बदबूदार, खून जैसा या मेनोपॉज के बाद होने वाला असामान्य वेजाइनल डिस्चार्ज भी चेतावनी का संकेत हो सकता है.

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किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

एक्सपर्ट के अनुसार यदि कोई लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे या महीने में 12 दिनों से ज्यादा दिखाई दे, तो तुरंत गायनेकोलॉजिक ऑन्कोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए. जिन महिलाओं के परिवार में ओवेरियन, ब्रेस्ट या कोलन कैंसर का हिस्ट्री रहा है, उन्हें विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत है. ऐसे मामलों में जैनिटक जोखिम अधिक होता है. क्योंकि ओवेरियन कैंसर के लिए सर्वाइकल या ब्रेस्ट कैंसर जैसी कोई नियमित स्क्रीनिंग टेस्ट उपलब्ध नहीं है, इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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