आप भी हैं फैटी लिवर का शिकार? तो आज से शुरू कर लें ये जरूरी काम

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बिना वजह घट रहा है वजन या रहती है थकान? हो सकता है कैंसर का ‘साइलेंट’ संकेत

बिना वजह घट रहा है वजन या रहती है थकान? हो सकता है कैंसर का ‘साइलेंट’ संकेत


Early Symptoms Of Stomach Cancer Explained: दुनियाभर में कई तरह के कैसर के मामले तेजी के साथ बढ़ रही है, इनमें से एक है पेट का कैंसर. शुरुआती चरण में इसका अक्सर कोई साफ लक्षण नहीं देता. जिन देशों में पेट के कैंसर की नियमित स्क्रीनिंग नहीं होती,वहां ज्यादातर मामलों का पता तब चलता है, जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है या पेट से बाहर फैलने लगती है. चलिए आपको कैंसर के मामलों के बारे में जानकारी देने वाली ऑनलाइन बेवसाइट American Cancer Society के हिसाब से बताते हैं कि इसके कौन से लक्षण ऐसे होते हैं, जिनको हमें इग्नोर नहीं करना चाहिए. 

पेट का बार-बार फूलना

भारी या मसालेदार खाना खाने के बाद पेट फूलना आम बात है. लेकिन अगर थोड़ी-सी मात्रा में खाना खाने पर या लगभग रोज ही पेट में भारीपन महसूस होने लगे, तो यह किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है. पेट के कैंसर के शुरुआती चरण में भोजन की गति धीमी पड़ जाती है, जिससे ऊपरी पेट में कसाव या जकड़न महसूस होती है. अगर यह सूजन खाने के प्रकार से जुड़ी न हो और बार-बार हो रही हो, तो डॉक्टर को दिखाना जरूरी है.

बिना वजन के लगातार तनाव

नींद पूरी न होने या तनाव के कारण थकान महसूस होना सामान्य है, लेकिन अगर बिना किसी साफ वजह के लगातार कमजोरी बनी रहे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. पेट में धीरे-धीरे होने वाली अंदरूनी ब्लीडिंग शुरुआत में नजर नहीं आती, लेकिन इससे शरीर में आयरन की कमी हो सकती है. अगर थकान के साथ चक्कर आना, त्वचा का पीला पड़ना या सांस फूलने जैसी परेशानी हो, तो मेडिकल जांच बेहद जरूरी है.

अचानक वजन का कम होना

यह एक ऐसा लक्षण है, जिसके बारे में लोग खुलकर बात नहीं करते. व्यक्ति सामान्य तरीके से खाना शुरू करता है, लेकिन आधा खाना खाते-खाते ही पेट भरने जैसा लगने लगता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कैंसर पेट की क्षमता को कम कर सकता है या भोजन को आगे बढ़ने से रोक सकता है. इसके साथ अचानक वजन कम होना भी देखा जा सकता है. अचानक सामान्य भोजन करने में परेशानी होना एक चेतावनी संकेत हो सकता है.

बार-बार मितली का आना

कभी-कभार मितली आना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन बिना किसी कारण बार-बार मिचली महसूस होना चिंता की बात हो सकती है. कुछ लोगों को खाना खाने के तुरंत बाद उलझन या मिचली होने लगती है, तो कुछ सुबह उठते ही ऐसा महसूस करते हैं. पेट की दीवार में ट्यूमर की जलन से लगातार मतली हो सकती है. यह ऐसा लक्षण है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, इसलिए अगर यह कुछ दिनों से ज्यादा बना रहे तो सतर्क होना जरूरी है.

इसको भी हल्के में नहीं लेना चाहिए

तेजाबियत और अपच की समस्या आजकल आम है, खासकर तला-भुना या मीठा खाने के बाद. लेकिन अगर लाइफस्टाइल बदलने या दवाइयां लेने के बावजूद ये परेशानी ठीक न हो, तो यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. लंबे समय तक अपच, ऊपरी पेट में दर्द या जलन पेट से जुड़ी बीमारियों, यहां तक कि कैंसर के शुरुआती लक्षण भी हो सकते हैं.

इसे भी पढ़ें- Energy Drinks Side Effects: क्या आप भी पीते हैं एनर्जी ड्रिंक, जानें कैसे कैफीन-शुगर का कॉम्बिनेशन किडनी कर रहा डैमेज?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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सुबह-सुबह उठकर कर लिया ये काम तो पेट हो जाएगा एकदम साफ, दिनभर रहेंगे फ्रेश

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Do This One Thing in the Morning for a Clean Gut: अगर सुबह की शुरुआत सही तरीके से हो जाए, तो उसका असर सीधे पेट की सेहत और पूरे दिन की एनर्जी पर पड़ता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सुबह उठते ही की गई कुछ छोटी-सी आदतें पेट को एकदम साफ रखने में मदद करती हैं और दिनभर हल्कापन व फ्रेशनेस बनी रहती है. अच्छी गट हेल्थ सिर्फ पाचन तक सीमित नहीं होती, बल्कि इम्युनिटी, मेटाबॉलिज्म, मूड और त्वचा की सेहत से भी गहराई से जुड़ी होती है. चलिए आपको बताते हैं कि आप क्या काम करके अपने पूरे दिन को सही बनाने के लिए पेट साफ करने के लिए क्या कर सकते हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

एआईआईएमएस से ट्रेंड और हार्वर्ड-स्टैनफोर्ड में पढ़ चुके गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने इंस्टाग्राम पर गट हेल्थ के लिए 10 बेहतरीन मॉर्निंग हैबिट्स साझा कीं. उनका कहना है कि अगर इन आदतों को रोज सुबह अपनाया जाए, तो कब्ज, गैस, ब्लोटिंग जैसी समस्याओं से काफी हद तक राहत मिल सकती है और पेट नियमित रूप से साफ रहता है.

 

सुबह उठते ही गुनगुना पानी पिएं

7 से 8 घंटे की नींद के बाद शरीर हल्का डिहाइड्रेट हो जाता है. ऐसे में खाली पेट गुनगुना पानी पीने से आंतें एक्टिव होती हैं और नैचुरल बाउल मूवमेंट में मदद मिलती है. चाहें तो इसमें नींबू की कुछ बूंदें मिला सकते हैं.

हल्की एक्सरसाइज या वॉक करें

सुबह की हल्की स्ट्रेचिंग, योग या 10 से 15 मिनट की वॉक पेट की मांसपेशियों को सक्रिय करती है. इससे आंतों की मूवमेंट बेहतर होती है, गैस कम होती है और पेट साफ होने में आसानी होती है.

फाइबर से भरपूर नाश्ता जरूरी

ओट्स, फल, चिया सीड्स या साबुत अनाज जैसे फाइबर-युक्त फूड्स गट के अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देते हैं. इससे पाचन सुधरता है और कब्ज की समस्या दूर रहती है.

नाश्ते में प्रोटीन शामिल करें

अंडे, दही, पनीर या टोफू जैसे प्रोटीन सोर्स डाइजेशन सिस्टम को मजबूत करते हैं और ब्लड शुगर को भी संतुलित रखते हैं। फाइबर और प्रोटीन का कॉम्बिनेशन पेट को लंबे समय तक हल्का रखता है.

खाते वक्त मोबाइल से दूरी रखें

फोन देखते हुए खाना खाने से पाचन धीमा हो जाता है. ध्यान से चबाकर खाने से खाना अच्छे से पचता है और ब्लोटिंग नहीं होती.

अदरक की चाय या नींबू पानी लें

अदरक पेट की सूजन कम करता है और भोजन को जल्दी पचाने में मदद करता है. गुनगुना नींबू पानी भी पेट को आराम देता है.

मीठे सीरियल्स से बचें और धूप लें

ज्यादा शुगर गट बैलेंस बिगाड़ सकती है. वहीं सुबह 10 से 15 मिनट की धूप विटामिन D बढ़ाकर पाचन और इम्युनिटी को सपोर्ट करती है.

यह भी पढ़ें – सिर्फ सुबह-सुबह टहलने से नहीं सुधरेगी हार्ट हेल्थ, जानें क्या-क्या है जरूरी?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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लगातार थकान और बार-बार बुखार आना सामान्य नहीं, हो सकते हैं इस कैंसर के लक्षण

लगातार थकान और बार-बार बुखार आना सामान्य नहीं, हो सकते हैं इस कैंसर के लक्षण


Early Warning Signs Of Blood Cancer: ब्लड कैंसर अक्सर अचानक या बहुत तेज लक्षणों के साथ सामने नहीं आता. यह धीरे-धीरे शरीर के अंदर असर डालता है और इसके शुरुआती संकेत कई बार मामूली समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं. ल्यूकेमिया, लिंफोमा और मल्टीपल मायलोमा जैसे ब्लड कैंसर बोन मैरो में शुरू होते हैं, जहां खून की सेल्स बनती हैं, और समय के साथ शरीर की सामान्य काम करने की क्षमता को प्रभावित करने लगते हैं.

शुरुआती पहचान क्यों है जरूरी?

अंबाला स्थित पूजा सुपरस्पेशलिटी क्लीनिक के विशेषज्ञ डॉ. दीपक सहोता के अनुसार, ब्लड कैंसर की जल्दी पहचान इलाज को काफी हद तक आसान बना सकती है. उनका कहना है कि समय रहते बीमारी पकड़ में आ जाए तो इलाज की सफलता बढ़ जाती है और ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट जैसे अहम विकल्पों की संभावना भी मजबूत होती है.

लगातार थकान को न समझें सामान्य

अगर बिना ज्यादा काम किए भी लगातार कमजोरी, थकान या सांस फूलने की शिकायत रहती है और आराम करने पर भी फर्क नहीं पड़ता, तो यह संकेत हो सकता है. डॉ. दीपक सहोता बताते हैं कि ब्लड कैंसर में शरीर पर्याप्त स्वस्थ रेड ब्लड सेल्स नहीं बना पाता, जिससे एनीमिया हो जाता है और यही थकान की बड़ी वजह बनती है.

बार-बार इंफेक्शन या बुखार आना

कमजोर इम्यून सिस्टम ब्लड कैंसर का अहम संकेत हो सकता है. बार-बार सर्दी, बुखार या छोटे इंफेक्शन का गंभीर रूप लेना इस ओर इशारा करता है कि शरीर की व्हाइट ब्लड सेल्स सही से काम नहीं कर पा रहीं.

बिना वजह खून आना या जल्दी चोट लगना

नाक या मसूड़ों से खून आना, हल्की चोट में भी ज्यादा नीला पड़ जाना या त्वचा पर छोटे-छोटे लाल-बैंगनी दाग दिखना प्लेटलेट्स की कमी का संकेत हो सकता है. ल्यूकेमिया में यह लक्षण आम हैं, लेकिन लोग अक्सर इन्हें मामूली मान लेते हैं.

वजन घटना, रात में पसीना और गांठें

अगर बिना डाइट या एक्सरसाइज के वजन तेजी से घट रहा हो, रात में ज्यादा पसीना आता हो या गर्दन, बगल या जांघ में दर्द रहित गांठ दिखे, तो सतर्क हो जाना चाहिए. ये लक्षण खासतौर पर लिंफोमा से जुड़े हो सकते हैं. वहीं हड्डियों, रीढ़ या पसलियों में लगातार दर्द मल्टीपल मायलोमा का संकेत हो सकता है.

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट- इलाज की उम्मीद

ब्लड कैंसर के कई मामलों में ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट बेहद प्रभावी इलाज है. इसमें खराब बोन मैरो की जगह स्वस्थ स्टेम सेल्स दी जाती हैं, जिससे नया ब्लड और इम्यून सिस्टम बनता है. आपको सावधानियों पर ध्यान देना चाहिए और अगर किसी तरह की कोई दिक्कत हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

इसे भी पढ़ें: Budget 2026 Cancer Relief: कैंसर की ये 17 दवाएं हुई सस्ती, यहां देख लें पूरी लिस्ट

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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बिना दवा के घर पर ऐसे ठीक हो जाएगा बीपी, नहीं पड़ेगी डॉक्टर की जरूरत

बिना दवा के घर पर ऐसे ठीक हो जाएगा बीपी, नहीं पड़ेगी डॉक्टर की जरूरत


How to Control High Blood Pressure Without Medicine: अगर आपका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ रहता है, तो यह जरूरी नहीं कि हर बार दवा ही इसका एकमात्र इलाज हो. सही लाइफस्टाइल अपनाकर बीपी को काबू में रखा जा सकता है और कई मामलों में दवाओं की जरूरत टाली या कम की जा सकती है. सेहतमंद आदतें न सिर्फ बीपी कंट्रोल करती हैं, बल्कि उसे लंबे समय तक स्थिर भी रखती हैं.  हेल्थ को लेकर ऑनलाइन जानकारी देने वाली वेबसाइट Mayoclinic के मुताबिक घर पर बीपी के देखभाल के लिए कुछ आसान तरीके हैं, जिनमें-

वजन घटाएं और कमर पर ध्यान दें

जैसे-जैसे वजन बढ़ता है, ब्लड प्रेशर भी ऊपर जाने लगता है. ज्यादा वजन होने पर स्लीप एपनिया जैसी समस्या भी हो सकती है, जो बीपी को और बढ़ा देती है. अच्छी बात यह है कि थोड़ा सा वजन कम करने से भी बीपी में सुधार दिखने लगता है. खासतौर पर पेट के आसपास जमा चर्बी हाई बीपी का खतरा बढ़ाती है, इसलिए कमर की माप पर ध्यान देना जरूरी हैय

नियमित एक्सरसाइज को दिनचर्या बनाएं

रोजाना 30 मिनट की हल्की से मध्यम एक्सरसाइज, जैसे तेज चलना, साइकिल चलाना, तैरना या डांस करना, ब्लड प्रेशर को काफी हद तक कम कर सकता है. नियमित शारीरिक गतिविधि न सिर्फ हाई बीपी घटाती है, बल्कि उसे दोबारा बढ़ने से भी रोकती है.

हेल्दी डाइट अपनाएं

साबुत अनाज, फल, सब्जियां और लो-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स से भरपूर डाइट ब्लड प्रेशर को नेचुरली कंट्रोल करने में मदद करती है. पोटैशियम से भरपूर चीजें, जैसे केला, पालक और दालें, नमक के असर को कम करती हैं और बीपी को संतुलित रखती हैं.

नमक और प्रोसेस्ड फूड कम करें

ज्यादा नमक बीपी बढ़ाने का बड़ा कारण है. पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड में छुपा हुआ सोडियम ज्यादा होता है, इसलिए इनसे दूरी बनाएं। खाना बनाते समय नमक की मात्रा कम रखें और स्वाद के लिए मसालों का इस्तेमाल करें.

शराब और सिगरेट से दूरी रखें

अधिक शराब पीने से ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ सकता है, वहीं धूम्रपान तुरंत बीपी बढ़ा देता है. इन आदतों को छोड़ने से दिल की सेहत में बड़ा सुधार आता है.

नींद और तनाव को नजरअंदाज न करें

लगातार कम नींद और ज्यादा तनाव भी हाई बीपी की वजह बन सकते हैं. रोज 7 से 8 घंटे की नींद लें और तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान या गहरी सांसों का अभ्यास करें.

घर पर बीपी की निगरानी करें

घर पर बीपी चेक करने से यह समझने में मदद मिलती है कि आपकी लाइफस्टाइल कितनी असरदार है. साथ ही समय-समय पर हेल्थ चेकअप भी जरूरी है.

यह भी पढ़ें – Brain Hemorrhage: क्यों होता है ब्रेन हैमरेज? एक्सपर्ट्स से जानें इसके कारण, प्रकार और बचाव के सबसे जरूरी तरीके

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हर में 6 में से 1 कपल है इंफर्टिलिटी से परेशान, जानें डाइट से कैसे होगा सुधार?

हर में 6 में से 1 कपल है इंफर्टिलिटी से परेशान, जानें डाइट से कैसे होगा सुधार?


How Lifestyle Affects Male Fertility: दुनियाभर में फर्टिलिटी रेट लगातार गिर रहा है. आज स्थिति यह है कि दुनिया के लगभग दो-तिहाई देशों में यह रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे चला गया है. सोरबोन यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ मेडिसिन में डेवलपमेंटल और रिप्रोडक्टिव बायोलॉजी की प्रोफेसर रैचेल लेवी के अनुसार, “फर्टिलिटी अब सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक पब्लिक हेल्थ इश्यू बन चुकी है. हर 6 में से 1 व्यक्ति इंफर्टिलिटी से जूझ रहा है.”

लाइफस्टाइल का अहम रोल

पिछले 50 वर्षों में पुरुषों में स्पर्म कंसंट्रेशन लगभग आधा रह गया है. इसके पीछे पर्यावरण से जुड़े कारणों के साथ-साथ लाइफस्टाइल फैक्टर्स भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं, जिनमें मोटापा और खराब खानपान प्रमुख हैं. 31 जनवरी 2025 को पेरिस में आयोजित इंस्टिट्यूट बेंजामिन डेलसेर्ट के वार्षिक कार्यक्रम में रैचेल लेवी ने बताया कि किस तरह बदली जा सकने वाली आदतें इंफर्टिलिटी को प्रभावित करती हैं और सही पोषण से फर्टिलिटी में सुधार की कितनी संभावना है.

रिसर्च में यह साफ हुआ है कि बॉडी मास इंडेक्स (BMI), डाइट और स्पर्म क्वालिटी के बीच गहरा संबंध है. दुनियाभर में BMI बढ़ने के साथ-साथ फर्टिलिटी रेट में गिरावट देखी जा रही है. मेडिकल असिस्टेड प्रजनन प्रक्रिया से गुजर रहे पुरुषों में ओवरवेट और मोटापा ओलिगोजोस्पर्मिया और एजोस्पर्मिया का खतरा बढ़ा देता है, जिससे गर्भधारण और लाइव बर्थ की संभावना कम हो जाती है.

कैसी रखें डाइट?

डाइट सीधे तौर पर स्पर्म बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करती है. कई स्टडीज में यह सामने आया है कि मेडिटेरेनियन डाइट अपनाने से स्पर्म की गुणवत्ता और फर्टिलिटी में सुधार होता है. इतना ही नहीं, गर्भधारण से पहले पिता की डाइट स्पर्म के डीएनए मिथाइलेशन को भी प्रभावित कर सकती है, जिसका असर भ्रूण के विकास पर पड़ता है.

हार्मोनल असंतुलन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, सूजन और एपिजेनेटिक बदलाव जोखिम भी पैदा करते हैं और सुधार का मौका भी देते हैं. अच्छी बात यह है कि कुछ मामलों में ये असर उलटे भी जा सकते हैं. एक स्टडी में पाया गया कि गर्भधारण से पहले नियमित फिजिकल एक्टिविटी और संतुलित आहार अपनाने से मेटाबॉलिक और हार्मोनल स्थिति सुधरी, स्पर्म डीएनए डैमेज कम हुआ और सीमन की एंटीऑक्सीडेंट क्षमता बेहतर हुई.

फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए क्या खाएं?

मेडिटेरेनियन डाइट को रिप्रोडक्टिव हेल्थ के लिए सबसे ज्यादा स्टडी किया गया है. इसमें हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज, लीन प्रोटीन और हेल्दी फैट शामिल होते हैं. पालक, केल जैसी सब्जियां, क्विनोआ और ओट्स, मछली-अंडे, दालें, एवोकाडो, नट्स और ऑलिव ऑयल फर्टिलिटी के लिए फायदेमंद माने जाते हैं.

किन चीजों से बचें?

ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, रिफाइंड शुगर, अत्यधिक कैफीन और शराब हार्मोनल संतुलन बिगाड़ सकते हैं. ट्रांस फैट और बहुत ज्यादा तले-भुने खाने से भी सूजन बढ़ती है.

एक्सपर्ट्स की सलाह

पोषण के साथ-साथ पर्याप्त पानी, नियमित हल्का व्यायाम और तनाव कम करना भी जरूरी है. अगर लंबे समय से गर्भधारण में परेशानी हो रही है या PCOS, थायरॉइड जैसी समस्या है, तो फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट और न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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