छुट्टी के दिन कैसे बढ़ाएं अपने चेहरे का ग्लो, संडे आने से पहले बना लें यह रूटीन
Weekend Glow Tips: छुट्टी के दिन कैसे बढ़ाएं अपने चेहरे का ग्लो, संडे आने से पहले बना लें यह रूटीन
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Weekend Glow Tips: छुट्टी के दिन कैसे बढ़ाएं अपने चेहरे का ग्लो, संडे आने से पहले बना लें यह रूटीन
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कई लोगों को सुबह उठते ही सिर में भारीपन या तेज दर्द महसूस होता है. अक्सर इस दर्द को सामान्य माना जाता है, लेकिन लगातार ऐसा होना शरीर में किसी गड़बड़ी का संकेत भी हो सकता है. नींद की कमी, तनाव, माइग्रेन, डिहाइड्रेशन और स्लीप एपनिया जैसे कई कारण सुबह के सिर दर्द की वजह बनते हैं. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि सुबह दर्द महसूस होने का कारण यह भी है कि नींद से जागने के दौरान दिमाग की संवेदनशीलता बढ़ जाती है, जिससे यह दर्द जल्दी महसूस होता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि सुबह उठते ही सिर दर्द क्यों होता है और इसके कारण क्या है.
नींद की कमी या खराब नींद
रात में पर्याप्त नींद न लेना, बार-बार नींद टूटना और देर रात तक स्क्रीन पर रहना सीधे तौर पर सुबह होने वाले सिर दर्द से जुड़ा है. नींद की कमी दिमाग में तनाव पैदा करती है, जिससे सुबह दर्द बढ़ने लगता है.
तनाव और मेंटल प्रेशर
ज्यादा स्ट्रेस होने पर मांसपेशियां टाइट हो जाती है, खासकर गर्दन और कंधों की. इससे ब्लड फ्लो प्रभावित होता है, सुबह उठते ही टेंशन-टाइप सिर दर्द होने लगता है.
माइग्रेन की समस्या
माइग्रेन से जूझ रहे लोगों में सुबह सिर दर्द होना आम है. नींद की कमी, तेज रोशनी, मौसम बदलने और खाली पेट सोने से माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है, जिससे सुबह तेज दर्द महसूस होता है.
स्लीप एपनिया
स्लीप एपनिया में सोते समय सांस रुक-रुक कर चलती है. जिसकी वजह से शरीर को पूरी ऑक्सीजन नहीं मिलती है. वहीं यह सुबह उठते ही तेज सिर दर्द, चक्कर और भारीपन का कारण बन सकता है. लगातार खर्राटे आना भी इसका संकेत हो सकता है.
डिहाइड्रेशन
रात में पानी न पीने और शरीर में फ्लूड लेवल कम होने से ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती है. इससे दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है और सिर दर्द शुरू हो जाता है.
शराब या कैफीन का असर
रात में शराब पीने या कैफीन का ज्यादा सेवन करने से नींद गहरी नहीं आती. इसके अलावा कैफीन अचानक छोड़ देने से भी सिर दर्द हो सकता है.
क्या करें अगर रोज सुबह सिर दर्द हो?
एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि अगर आपको हफ्ते में सिर दर्द कई बार हो रहा है, बहुत तेज हो रहा है या इसके साथ दूसरे लक्षण जैसे चक्कर आना, सांस की समस्या या धुंधला दिखाई देने जैसी समस्या हो रही है तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. इसके अलावा सुबह के सिर दर्द से बचने के लिए आपको कोशिश करनी चाहिए कि आप रोजाना एक ही समय पर सोए और उठें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिए खासकर रात में. इसके अलावा सोने से पहले कैफीन और शराब से बचें और आरामदायक नींद एनवायरमेंट बनाए.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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तिल जैसे छोटे बीज कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक और विटामिन D से भरपूर होते हैं, जो हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी हैं. इन्हें सलाद, चटनी या पराठों में जोड़कर आसानी से रोज की रोजमर्रा की डाइट में शामिल किया जा सकता है.
सर्दियों का मौसम शुरू होते ही कई लोगों की उंगलियां अचानक सफेद, नीली या बैंगनी पड़ने लगती हैं. इसके साथ झनझनाहट, दर्द और सूजन की समस्या भी होने लगती है. अक्सर लोग इस सामान्य ठंड समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह रेनाड्स सिंड्रोम का संकेत हो सकता है. यह समस्या खास तौर पर 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है.
खासकर उन लोगों में जो ठंडा और गर्म पानी के बीच लगातार कम करते हैं या लंबे समय तक ठंडे माहौल में रहते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि ठंड में अगर आपकी उंगलियां भी नीली पड़ जाती है तो यह शरीर में किस चीज की कमी से होती है.
ठंड में उंगलियां क्यों पड़ जाती है नीली?
रेनाड्स सिंड्रोम में हाथ और पैरों की उंगलियों की धमनियां ठंड पड़ते ही सिकुड़ जाती है. इस वजह से उंगलियाें तक प्योर खून और ऑक्सीजन पहुंचाना कम हो जाता है. वहीं जब ऑक्सीजन की कमी होती है तो उंगलियां पहले सफेद फिर नीली और बाद में लाल पड़ने लगती है. वहीं ब्लड सर्कुलेशन रुकने पर उंगलियों में सुन्नपन, जलन और दर्द होता है. इसके अलावा बार-बार ऐसा होने पर उंगलियों में घाव भी बन सकते हैं. यह समस्या अचानक तनाव में आने पर भी ट्रिगर हो सकती है और कुछ लोगों को 60 से 70 डिग्री फारेनहाइट जैसी सामान्य ठंड में भी इसके लक्षण दिखने लगते हैं.
किन लोगों में रहता है सबसे ज्यादा खतरा?
उंगलियां नीली पड़ने का खतरा सबसे ज्यादा होटल और खानपान इंडस्ट्री में काम करने वाले लोगों, वाइब्रेटिंग टूल्स चलने वाले मजदूर, ठंडा-गर्म पानी में लगातार हाथ डालने वाले लोग और घर का काम करने वाली महिलाओं को ज्यादा होता है. डॉक्टरों के अनुसार सर्दियों में ओपीडी में करीब 60 प्रतिशत तक मरीज इसी समस्या के लक्षणों के साथ पहुंचते हैं. लापरवाही बढ़ने पर उंगलियां काली पड़ सकती है और गंभीर मामलों में उत्तक भी नष्ट होने लगते हैं.
कैसे करें इससे बचाव?
रेनाड्स से बचाव करने के लिए कोशिश करें कि आप ज्यादा ठंडे पानी के संपर्क में न आएं, घर में नंगे पैर न चले, फ्रिज में हाथ न डालें और उसके सामने खड़े न हो. इसके अलावा डिटर्जेंट या कपड़े धोने वाले साबुन को सीधे हाथ में न लगाए, ऊनी ग्लव्स और मोजे पहन कर रखें और बर्तन धोते समय रबड़ के ग्लव्स जरूर पहनें. दरअसल रेनाड्स का शुरुआती इलाज दवाओं से किया जा सकता है लेकिन कुछ मामलों में बायोफीडबैक टेक्निक से हाथों का तापमान कंट्रोल किया जाता है. वहीं अगर दवाओं से राहत न मिले तो समस्या बढ़ने पर सर्जरी भी की जाती है.
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आज की हेक्टिक लाइफ में हम सभी कहीं न कहीं अपने शरीर की केयर करना भूल जाते हैं. खासकर जो लोग ऑफिस में घंटों कंप्यूटर या लैपटॉप के सामने बैठकर काम करते हैं, वे अक्सर कमर दर्द, गर्दन में जकड़न, पीठ में खिंचाव और जोड़ों की समस्याओं से परेशान रहते हैं. लगातार बैठकर काम करने की वजह से न सिर्फ शारीरिक थकान होती है, बल्कि धीरे-धीरे यह आदत कई बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम्स को बड़ा दे सकती है. ऐसे में बहुत जरूरी हो जाता है कि हम अपनी डेली लाइफ में ऐसी आदतें शामिल करें, जो हमारे शरीर को एक्टिव बनाए रखें. ऐसे में फिजियोथेरेपी एक ऐसा ही आसान, सेफ और कारगर तरीका है जो न सिर्फ चोट या दर्द में राहत देता है, बल्कि फ्यूचर में होने वाली बीमारियों से भी बचाता है. फिजियोथेरेपी सिर्फ इलाज का तरीका नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी लाइफस्टाइल है जिसे अपनाकर लंबे समय तक हेल्दी और एक्टिव रह सकते हैं. तो चलिए आज हम आपको फिजियोथेरेपिस्ट की ऑफिस में बैठकर काम करने वालों के लिए आसान टिप्स बताते हैं.
क्या है फिजियोथेरेपी और क्यों है जरूरी?
फिजियोथेरेपी एक मेडिकल प्रैक्टिस है जिसमें दवाइयों की जगह एक्सरसाइज, मसाज, स्ट्रेचिंग और सही बॉडी पॉश्चर की मदद से शरीर को ठीक किया जाता है. यह उन लोगों के लिए बेहद जरूरी है जो लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठे रहते हैं, कंप्यूटर या लैपटॉप पर झुककर काम करते हैं, लगातार मोबाइल या टैबलेट यूज करते हैं, बुजुर्ग हैं या जिनकी हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं, किसी चोट, फ्रैक्चर या सर्जरी से रिकवरी कर रहे हैं. ऐसे में फिजियोथेरेपी की मदद से मांसपेशियों की ताकत बढ़ती है, हड्डियां मजबूत होती हैं, शरीर की मोबिलिटी बेहतर होती है, मेंटल स्ट्रेस भी कम होता है, चोट या सर्जरी के बाद जल्दी रिकवरी होती है.
ऑफिस में काम करने वालों के लिए आसान और असरदार फिजियोथेरेपी टिप्स
1. हर 30-40 मिनट में ब्रेक लें – लंबे समय तक बैठना शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है. ऐसे में हर आधे घंटे में 2–3 मिनट का छोटा ब्रेक लें, खड़े हों, थोड़ा चलें या स्ट्रेच करें.
2. सही बैठने का तरीका अपनाएं – ऑफिस में काम करने के लिए बैठते समय पीठ सीधी रखें, कंधे ढीले और रिलैक्स रखें, पैरों को जमीन पर सीधा रखें, साथ ही आपकी स्क्रीन आंखों के सामने हो, ताकि गर्दन न झुके.
3. हल्की स्ट्रेचिंग करें – काम के बीच-बीच में हाथ, गर्दन, पीठ और पैरों की हल्की स्ट्रेचिंग करें. इससे ब्लड फ्लो बेहतर होता है और जकड़न दूर होती है.
4. सुबह 20–30 मिनट की हल्की एक्सरसाइज – दिन की शुरुआत हल्की एक्सरसाइज और योग से करें. इससे शरीर में फ्लेक्सिबिलिटी आती है और दिनभर एक्टिव नेस बनी रहती है.
5. नींद और आराम भी जरूरी है – शरीर को रिकवर करने के लिए 7–8 घंटे की नींद बेहद जरूरी है. सोने से पहले मोबाइल या लैपटॉप का यूज कम करें.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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क्लबसिंग एक ऐसा बदलाव है, जिसमें उंगलियों के सिर गोल हो जाते हैं और नाखून आगे की ओर ज्यादा घुमावदार दिखने लगते हैं. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ऐसा तब होता है जब शरीर मेगाकैरियोसाइट्स फेफड़ों को बाईपास कर उंगलियां तक पहुंच जाते हैं और वहां ग्रोथ फैक्टर रिलीज करते हैं. यह बदलाव अक्सर क्रॉनिक लंग डिजीज जैसे फेफड़ों का कैंसर सिस्टिक फाइब्रोसिस, पल्मोनरी फाइब्रोसिस, ब्रोन्किइक्टेसिस या लंबे समय तक कम ऑक्सीजन वाली स्थितियों जैसे हार्ट डिजीज में देखा जाता है. ऐसे में अगर उंगलियां अचानक मोटी और गोल लगने लगे तो तुरंत डॉक्टर से जांच करनी चाहिए.

इसके अलावा कोइलोनिखिया यानी स्पून नेल्स आयरन डेफिशियेंसी एनीमिया का शुरुआती संकेत होता है. इसमें नाखून इतने पतले हो जाते हैं कि उनकी सतह अंदर की ओर धंस जाती है और चम्मच जैसी दिखाई देती है. इसे लेकर एक्सपर्ट्स बताते हैं कि यह आयरन की कमी, भारी पीरियड्स, गर्भावस्था, पोषण की कमी या फिर किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. खास बात यह है कि यह नाखूनों में बदलाव कई बार अन्य लक्षणों से महीनाें पहले दिखाई देते हैं.
Published at : 12 Dec 2025 10:12 AM (IST)