घर में ही चेक कर सकते हैं हार्ट में कहीं जम तो नहीं रहा प्लाक, ये 5 तरीके करते हैं मदद

घर में ही चेक कर सकते हैं हार्ट में कहीं जम तो नहीं रहा प्लाक, ये 5 तरीके करते हैं मदद


ब्लड प्रेशर की रोजाना जांच इस दिशा में सबसे आसान संकेत देती है. लगातार बढ़ा हुआ BP कई बार बताता है कि आर्टरीज सख्त हो रही हैं और हार्ट को खून पंप करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही है.

हार्ट रेट और रिद्म पर नजर रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. अनियमित धड़कन, बहुत तेज या बहुत धीमी हार्ट रेट आर्टरीज में बदलाव या हार्ट पर तनाव का शुरुआती संकेत हो सकता है.

हार्ट रेट और रिद्म पर नजर रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. अनियमित धड़कन, बहुत तेज या बहुत धीमी हार्ट रेट आर्टरीज में बदलाव या हार्ट पर तनाव का शुरुआती संकेत हो सकता है.

स्टेयर क्लाइंब टेस्ट आपकी क्षमता का सरल घरेलू पैमाना है. अगर चार फ्लाइट सीढ़ियां चढ़ते समय सांस जल्दी फूलने लगे, चक्कर आए या छाती भारी लगे, तो दिल तक खून का बहाव कम हो सकता है.

स्टेयर क्लाइंब टेस्ट आपकी क्षमता का सरल घरेलू पैमाना है. अगर चार फ्लाइट सीढ़ियां चढ़ते समय सांस जल्दी फूलने लगे, चक्कर आए या छाती भारी लगे, तो दिल तक खून का बहाव कम हो सकता है.

एंकल-ब्रेकियल इंडेक्स टेस्ट भी घर पर किया जा सकता है. हाथ और टखने के BP में फर्क दिखे, खासकर टखने का BP कम हो, तो यह पैरों की धमनियों में ब्लॉकेज का संकेत देता है.

एंकल-ब्रेकियल इंडेक्स टेस्ट भी घर पर किया जा सकता है. हाथ और टखने के BP में फर्क दिखे, खासकर टखने का BP कम हो, तो यह पैरों की धमनियों में ब्लॉकेज का संकेत देता है.

लक्षणों की निगरानी बेहद जरूरी है. सीने में दबाव, थकान, चक्कर, सांस चढ़ना या असामान्य पसीना  ये सब धमनी समस्या के शुरुआती संकेत हो सकते हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

लक्षणों की निगरानी बेहद जरूरी है. सीने में दबाव, थकान, चक्कर, सांस चढ़ना या असामान्य पसीना ये सब धमनी समस्या के शुरुआती संकेत हो सकते हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

आजकल घर पर ECG डिवाइस भी काफी मददगार साबित हो रहे हैं. ये हार्ट की इलेक्ट्रिक गतिविधि रिकॉर्ड कर बताते हैं कि आर्टरीज में रुकावट के कारण दिल पर अतिरिक्त तनाव तो नहीं बढ़ रहा.

आजकल घर पर ECG डिवाइस भी काफी मददगार साबित हो रहे हैं. ये हार्ट की इलेक्ट्रिक गतिविधि रिकॉर्ड कर बताते हैं कि आर्टरीज में रुकावट के कारण दिल पर अतिरिक्त तनाव तो नहीं बढ़ रहा.

आर्टरीज में प्लाक को रोकना संभव है, बस निरंतर देखभाल जरूरी है. नियमित एक्सरसाइज, सही खान-पान, तनाव कम करने की आदतें और समय-समय पर जांच आपको लंबे समय तक दिल की मजबूती और बेहतर हार्ट स्वास्थ्य दे सकती हैं.

आर्टरीज में प्लाक को रोकना संभव है, बस निरंतर देखभाल जरूरी है. नियमित एक्सरसाइज, सही खान-पान, तनाव कम करने की आदतें और समय-समय पर जांच आपको लंबे समय तक दिल की मजबूती और बेहतर हार्ट स्वास्थ्य दे सकती हैं.

Published at : 27 Nov 2025 10:30 AM (IST)

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क्या आप भी रोजाना स्किप कर देती हैं ब्रेकफास्ट, जानें अपने कितने अंगों को कर रहीं तबाह?

क्या आप भी रोजाना स्किप कर देती हैं ब्रेकफास्ट, जानें अपने कितने अंगों को कर रहीं तबाह?


एक्सपर्ट्स के अनुसार ब्रेकफास्ट स्किप करना सिर्फ एक मिल छोड़ना नहीं बल्कि शरीर के पूरे स्ट्रक्चर को बिगाड़ना है. बिना ब्रेकफास्ट के शरीर लंबे समय तक न्यूट्रीशनल डेफिसिट में जाता है, जिससे दोपहर तक बहुत ज्यादा भूख लगती है. यही भूख बाद में बड़े पोर्शन खाने और हाई कैलोरी फूड चुनने की वजह बन जाती है. जिससे वजन और पेट में चर्बी बढ़ने लगती है.

ब्रेकफास्ट छोड़ने से भूख बढ़ाने वाला हार्मोन घ्रेलिन ज्यादा एक्टिव हो जाता है, जिससे मीठा और फैटी फूड खाने की क्रेविंग बढ़ती है. साथ ही इंसुलिन सेंसिटिविटी भी कम हो जाती है, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल बिगड़ने लगता है. यह पैटर्न ओवरईटिंग अनियमित एनर्जी लेवल और वजन बढ़ने की बड़ी वजह बन जाता है.

ब्रेकफास्ट छोड़ने से भूख बढ़ाने वाला हार्मोन घ्रेलिन ज्यादा एक्टिव हो जाता है, जिससे मीठा और फैटी फूड खाने की क्रेविंग बढ़ती है. साथ ही इंसुलिन सेंसिटिविटी भी कम हो जाती है, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल बिगड़ने लगता है. यह पैटर्न ओवरईटिंग अनियमित एनर्जी लेवल और वजन बढ़ने की बड़ी वजह बन जाता है.

वहीं रिसर्च बताती है कि जो लोग रोजाना ब्रेकफास्ट स्किप करते हैं उनमें एलडीएल यानी बेड कोलेस्ट्रॉल का लेवल ज्यादा पाया गया है. यह कोलेस्ट्रॉल दिल की बीमारी और हार्ट ब्लॉकेज का बड़ा कारण है. सुबह का ब्रेकफास्ट न खाने से शरीर पर मेटाबॉलिक स्ट्रेस भी बढ़ता है जो हार्ट हेल्थ को लंबे समय में नुकसान पहुंचता है.

वहीं रिसर्च बताती है कि जो लोग रोजाना ब्रेकफास्ट स्किप करते हैं उनमें एलडीएल यानी बेड कोलेस्ट्रॉल का लेवल ज्यादा पाया गया है. यह कोलेस्ट्रॉल दिल की बीमारी और हार्ट ब्लॉकेज का बड़ा कारण है. सुबह का ब्रेकफास्ट न खाने से शरीर पर मेटाबॉलिक स्ट्रेस भी बढ़ता है जो हार्ट हेल्थ को लंबे समय में नुकसान पहुंचता है.

ब्रेकफास्ट स्किप करने की आदत धीरे-धीरे मेटाबोलिक सिंड्रोम को भी जन्म देती है. जिसमें पेट की चर्बी, हाई बीपी, हाई शुगर और खराब कोलेस्ट्रॉल एक साथ बढ़ जाते हैं. यही पैटर्न आगे चलकर टाइप टू डायबिटीज का बड़ा खतरा बनता है जो लोग रोजाना नाश्ता नहीं करते उनमें डायबिटीज का खतरा भी ज्यादा पाया गया है.

ब्रेकफास्ट स्किप करने की आदत धीरे-धीरे मेटाबोलिक सिंड्रोम को भी जन्म देती है. जिसमें पेट की चर्बी, हाई बीपी, हाई शुगर और खराब कोलेस्ट्रॉल एक साथ बढ़ जाते हैं. यही पैटर्न आगे चलकर टाइप टू डायबिटीज का बड़ा खतरा बनता है जो लोग रोजाना नाश्ता नहीं करते उनमें डायबिटीज का खतरा भी ज्यादा पाया गया है.

इसके अलावा सुबह पौष्टिक खाना न मिलने से शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती है. ऐसे लोग जल्दी थकान महसूस करते है, चिड़चिड़ा रहते हैं और ध्यान लगाने में दिक्कत आती है. वहीं अस्थिर ब्लड शुगर लेवल मेंटल डिस्प्ले को भी कम कर देता है.

इसके अलावा सुबह पौष्टिक खाना न मिलने से शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती है. ऐसे लोग जल्दी थकान महसूस करते है, चिड़चिड़ा रहते हैं और ध्यान लगाने में दिक्कत आती है. वहीं अस्थिर ब्लड शुगर लेवल मेंटल डिस्प्ले को भी कम कर देता है.

वहीं जब सुबह से दोपहर तक लंबा गैप होता है तो शरीर जल्दी ऊर्जा पाने के लिए मीठे, तले और हाई कैलोरी फूड की तरफ खींचता है. इससे डाइट की क्वालिटी खराब होती है और लंबे समय में वजन, शुगर और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है.

वहीं जब सुबह से दोपहर तक लंबा गैप होता है तो शरीर जल्दी ऊर्जा पाने के लिए मीठे, तले और हाई कैलोरी फूड की तरफ खींचता है. इससे डाइट की क्वालिटी खराब होती है और लंबे समय में वजन, शुगर और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है.

Published at : 27 Nov 2025 08:49 AM (IST)

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क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग से ठीक हो जाता है लिवर? जानें इसके पीछे का पूरा सच

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पेट में गैस से रहते हैं परेशान तो आज ही आजमा लें ये 3 हर्बल चाय, अमेरिका के डॉक्टर भी देते हैं सलाह

पेट में गैस से रहते हैं परेशान तो आज ही आजमा लें ये 3 हर्बल चाय, अमेरिका के डॉक्टर भी देते हैं सलाह


एक्सपर्ट्स के अनुसार तुलसी की चाय ब्लोटिंग पर जादू की तरह काम करती है. तुलसी में ऐसे नेचुरल कंपाउंड्स होते हैं जो पाचन तंत्र की मांसपेशियों को रिलैक्स करते हैं और फंसी हुई गैस बाहर निकालने में मदद करते हैं.

घर में तुलसी की चाय बनाने के लिए उबलते पानी में कुछ ताजी तुलसी के पत्तियां डालकर 5 से 10 मिनट कर तक ढककर रख दें. फिर इसे छान कर गरमा-गरम पी लें. इससे आपको ब्लोटिंग जैसी समस्याओं से जल्दी राहत मिल जाएगी.

घर में तुलसी की चाय बनाने के लिए उबलते पानी में कुछ ताजी तुलसी के पत्तियां डालकर 5 से 10 मिनट कर तक ढककर रख दें. फिर इसे छान कर गरमा-गरम पी लें. इससे आपको ब्लोटिंग जैसी समस्याओं से जल्दी राहत मिल जाएगी.

इसके अलावा आप पेट में गैस से परेशान रहते हैं तो किचन में आसानी से मिलने वाली सौंफ भी इस समस्या के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है. 2017 की एक स्टडी के अनुसार सौंफ में मौजूद कंपाउंड anethole पाचन तंत्र की मांसपेशियों को ढीला करता है जिससे गैस जल्दी निकल जाती है.

इसके अलावा आप पेट में गैस से परेशान रहते हैं तो किचन में आसानी से मिलने वाली सौंफ भी इस समस्या के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है. 2017 की एक स्टडी के अनुसार सौंफ में मौजूद कंपाउंड anethole पाचन तंत्र की मांसपेशियों को ढीला करता है जिससे गैस जल्दी निकल जाती है.

सौंफ की चाय पीने के लिए आप सौंफ के दानों को हल्का क्रश करके पानी में 10 से 15 मिनट तक उबाल लें और फिर छान कर इसे चाय की तरह पी लें.

सौंफ की चाय पीने के लिए आप सौंफ के दानों को हल्का क्रश करके पानी में 10 से 15 मिनट तक उबाल लें और फिर छान कर इसे चाय की तरह पी लें.

वहीं अदरक में मौजूद गुण ब्लोटिंग गैस और पेट दर्द को तेजी से कम करते हैं. 2018 की एक रिसर्च में पाया गया है कि अदरक आंतों में दबाव कम करता है, क्रैम्पिंग से राहत देता है और पेट फूलने जैसी समस्याओं को घटाता है.

वहीं अदरक में मौजूद गुण ब्लोटिंग गैस और पेट दर्द को तेजी से कम करते हैं. 2018 की एक रिसर्च में पाया गया है कि अदरक आंतों में दबाव कम करता है, क्रैम्पिंग से राहत देता है और पेट फूलने जैसी समस्याओं को घटाता है.

अदरक वाली चाय बनाने के लिए आप 1 से 2 इंच अदरक के स्लाइस काटकर पानी में 10 से 15 मिनट तक उबाल लें और फिर इसे भी चाय की तरह पी लें.

अदरक वाली चाय बनाने के लिए आप 1 से 2 इंच अदरक के स्लाइस काटकर पानी में 10 से 15 मिनट तक उबाल लें और फिर इसे भी चाय की तरह पी लें.

यह तीनों ही चाय पाचन तंत्र को शांत करती है और गैस को नेचुरली बाहर निकालने में मदद करती है. इन्हें आप एक बार में बड़ी मात्रा में बनाकर शाम के दौरान धीरे-धीरे पी सकते हैं. हालांकि गैस की समस्या खत्म करने का यह इकलौता इलाज नहीं है. गैस की समस्या खत्म करने के लिए खाने में सावधानी, पोषण कंट्रोल और माइंडफुल ईटिंग भी जरूरी है ताकि पेट हेल्दी रहे.

यह तीनों ही चाय पाचन तंत्र को शांत करती है और गैस को नेचुरली बाहर निकालने में मदद करती है. इन्हें आप एक बार में बड़ी मात्रा में बनाकर शाम के दौरान धीरे-धीरे पी सकते हैं. हालांकि गैस की समस्या खत्म करने का यह इकलौता इलाज नहीं है. गैस की समस्या खत्म करने के लिए खाने में सावधानी, पोषण कंट्रोल और माइंडफुल ईटिंग भी जरूरी है ताकि पेट हेल्दी रहे.

Published at : 27 Nov 2025 07:04 AM (IST)

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सफदरजंग अस्पताल ने रचा इतिहास, पहली बार 11 साल के बच्चे का सफल किडनी ट्रांसप्लांट

सफदरजंग अस्पताल ने रचा इतिहास, पहली बार 11 साल के बच्चे का सफल किडनी ट्रांसप्लांट



दिल्ली के वीएमएमसी और सफदरजंग अस्पताल ने 19 नवंबर 2025 को किडनी प्रत्यारोपण सेवाओं में नया अध्याय जोड़ते हुए पहली बार किसी बच्चे का सफल किडनी ट्रांसप्लांट कर दिखाया. यह उपलब्धि न सिर्फ अस्पताल के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि देश के किसी भी केंद्रीय सरकारी अस्पताल में किया गया पहला पेडियाट्रिक किडनी ट्रांसप्लांट भी है.

11 साल के बच्चे को मिला नया जीवन

यूपी के सुल्तानपुर का 11 वर्षीय बच्चा करीब डेढ़ साल से ‘बाइलेटरल हाइपोडिसप्लास्टिक किडनी’ जैसी दुर्लभ स्थिति से जूझ रहा था. गंभीर हालात में सफदरजंग अस्पताल लाए गए बच्चे को इलाज के दौरान कार्डियक अरेस्ट तक हुआ और जांच में पता चला कि उसकी दोनों किडनियां पूरी तरह फेल हो चुकी हैं. तब से वह नियमित डायलिसिस पर निर्भर था.

मां बनीं जीवनदायिनी, जटिल सर्जरी रही सफल

विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में किडनी ट्रांसप्लांट हमेशा मुश्किल माना जाता है. छोटे शरीर में वयस्क किडनी फिट करना और नाजुक रक्तवाहिनियों से जोड़ना बेहद जटिल प्रक्रिया होती है. बच्चे की मां ने किडनी दान की और सर्जरी के बाद किडनी ने तुरंत काम करना शुरू कर दिया. डॉक्टरों का कहना है कि बच्चा अब डायलिसिस की जरूरत से पूरी तरह मुक्त हो चुका है और तेजी से स्वस्थ हो रहा है.

आर्थिक संकट के बीच अस्पताल बना सहारा

बच्चे के पिता मजदूरी से परिवार चलाते हैं और निजी अस्पताल में होने वाला लाखों रुपये का खर्च उनके लिए नामुमकिन था. अस्पताल प्रशासन ने न केवल प्रत्यारोपण की प्रक्रिया संभाली, बल्कि उसके बाद लगने वाली महंगी दवाओं का खर्च भी खुद वहन करने की घोषणा की. 

विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने मिलकर रचा इतिहास

अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. संदीप बंसल ने कहा कि यह उपलब्धि मेडिकल टीम की वर्षों की मेहनत और समर्पण का नतीजा है. उन्होंने इसे देश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता और भरोसे को मजबूत करने वाला कदम बताया. इस सर्जरी का नेतृत्व यूरोलॉजी और रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के प्रमुख डायरेक्टर प्रो. डॉ. पवन वासुदेवा ने किया. उनके साथ प्रो. डॉ. नीरज कुमार भी सर्जिकल टीम में शामिल थे. पेडियाट्रिक टीम का नेतृत्व डॉ. शोभा शर्मा ने किया, जिनके साथ डॉ. श्रीनिवासवरदन और विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप के. देबता जुड़े रहे. एनेस्थीसिया टीम का संचालन डॉ. सुशील ने किया, जिनकी टीम में डॉ. ममता और डॉ. सोनाली शामिल थीं.

ये भी पढ़ें: कैंसर के इलाज में बड़ी छलांग, भारत में बना AI अब बताएगा ट्यूमर का असली खेल

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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कौन-सी दवाएं ज्यादा बनाती है देश की फार्मा इंडस्ट्री, आपकी सेहत के लिए क्या है फ्यूचर प्लानिंग?

कौन-सी दवाएं ज्यादा बनाती है देश की फार्मा इंडस्ट्री, आपकी सेहत के लिए क्या है फ्यूचर प्लानिंग?



अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ बम के बाद अगर देश की किसी इंडस्ट्री पर सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा था तो वह फार्मा सेक्टर है. कभी सोचा है कि अमेरिका में दवाओं की खपत को करीब 80 पर्सेंट पूरा करने वाली भारत की फार्मा इंडस्ट्री कौन-सी दवाएं सबसे ज्यादा बनाती है? इसके अलावा आपकी सेहत के लिए इस सेक्टर में क्या प्लानिंग चल रही है? आइए जानते हैं.

सरकार की यह है प्लानिंग

सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के जॉइन मेडिसिन कंट्रोलर डॉ. आर चंद्रशेखर के मुताबिक, भारतीय फार्मा इंडस्ट्री में इस वक्त रिसर्च एवं डेवलपमेंट (R&D) पर खास जोर दिया जा रहा है. इसका मकसद जेनेरिक दवाओं को बनाने के साथ-साथ नई दवाओं और तकनीक को डिवेलप करना है. इसके तहत भारत सरकार ने प्रमोशन ऑफ रिसर्च एंड इनोवेशन इन फार्मा-मेडटेक सेक्टर (पीआरआईपी) नामक बड़ी योजना शुरू की है, जिस पर करीब 5,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इस स्कीम के तहत प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई को रिसर्च के लिए फाइनेंशियल हेल्प दी जा रही है. 

उन्होंने ग्रेटर नोएडा के एक्सपो सेंटर में आयोजित 18वें सीपीएचआई और पिमेक इंडिया एक्सपो में बताया कि एक लाख करोड़ रुपये की नई हॉस्पिटल फाइनेंस योजना से देश के फार्मा सेक्टर में रिसर्च एंड डिवेलपमेंट को मजबूत करेगी. उन्होंने कहा कि इस वक्त भारत को दुनिया की फार्मेसी कहा जाता है, लेकिन हॉस्पिटल फाइनेंस योजना से देश अगले पांच साल में दुनिया की फार्मेसी से एक इनोवेशन-नेतृत्व वाले फार्मा राष्ट्र के रूप में डिवेलप होने की तरफ कदम बढ़ा देगा. 

कौन-सी दवाएं बनाती है फार्मा इंडस्ट्री?

फार्मास्युटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष नामित जोशी ने बताया कि भारत का फार्मा उद्योग इस वक्त पूरी दुनिया में ‘जेनेरिक्स हब’ के नाम से जाना जाता है. अब ग्लोबल फार्मास्युटिकल  की फील्ड में तेजी से बदलाव हो रहा है. ऐसे में दुनिया की फार्मेसी बने रहने के लिए भारत को अपनी पारंपरिक जेनेरिक्स मानसिकता से आगे बढ़ना होगा और वैल्यू बेस्ड इनोवेशन पर फोकस करना होगा. साथ ही, पेप्टाइड्स, जटिल जेनेरिक्स, बायोसिमिलर्स, बायोलॉजिक्स और सेल व जीन थैरेपी में अपनी क्षमताएं बढ़ानी होंगी. 

फार्मा सेक्टर में भी आत्मनिर्भर हो रहा भारत

इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के एमडी योगेश मुद्रास के मुताबिक, भारत के फार्मास्युटिकल सेक्टर ने काफी तेजी दिखाई है. इसकी वजह से निर्यात दोगुना होकर 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है. इसमें काफी तेजी से बदलाव हो रहा है, क्योंकि भारत पारंपरिक जेनेरिक्स, जटिल फॉर्मूलेशन, बायोलॉजिक्स और एडवांस्ड ट्रीटमेंट में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है.

ये भी पढ़ें: कैंसर के इलाज में बड़ी छलांग, भारत में बना AI अब बताएगा ट्यूमर का असली खेल

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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